27 किलो चांदी लूटकांड में कार चालक गिरफ्तार, 6.958 किलो चांदी बरामद

27 किलो चांदी लूटकांड में कार चालक गिरफ्तार, 6.958 किलो चांदी बरामद

(रणभेरी): वाराणसी शहर की आभूषण मंडी में 16 जुलाई को हुई करीब 27 किलो चांदी की लूट के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किया गया आरोपी प्रशांत जेवियर टिर्की झारखंड के लातेहार का रहने वाला है और पेशे से कार चालक है। पुलिस के अनुसार, प्रशांत ने ही लूट की वारदात में शामिल आरोपियों को प्रयागराज से वाराणसी पहुंचाया और घटना के बाद उन्हें वापस प्रयागराज छोड़ा था।

पुलिस का दावा है कि प्रशांत को इस बात की जानकारी थी कि उसके साथ सफर कर रहे लोग वारदात को अंजाम देने के लिए आए हैं। लूट के बाद उन्हें वापस ले जाने में भी उसने मदद की। उसके कब्जे से 6.958 किलोग्राम चांदी बरामद की गई है। पुलिस ने आरोपी को संबंधित धाराओं में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

300 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की जांच से खुला रास्ता

लूट की घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए वाराणसी से प्रयागराज के बीच कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस टीम ने 300 से अधिक कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की। इसके साथ ही रास्ते में पड़ने वाले टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज को भी देखा गया।

लगातार की गई जांच के दौरान पुलिस को वारदात के पीछे ईरानी गैंग के सक्रिय होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से करीब चार किलो चांदी बरामद हुई थी। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई बलेनो कार भी कब्जे में ली थी।

दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का अगला केंद्र कार चालक प्रशांत बना। उसकी तलाश में कई जगह दबिश दी गई। इसी दौरान पुलिस को उसके इंग्लिशिया लाइन स्थित माल गोदाम के पास मौजूद होने की सूचना मिली।

माल गोदाम के पास से पुलिस ने दबोचा

डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद चौक पुलिस की टीम ने माल गोदाम, इंग्लिशिया लाइन इलाके में घेराबंदी की। पुलिस ने मौके से प्रशांत जेवियर टिर्की को गिरफ्तार कर लिया।

तलाशी के दौरान उसके पास से 6.958 किलो चांदी मिली। पूछताछ में उसकी भूमिका को लेकर पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, प्रशांत पूर्व में भी तीन आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है। उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि प्रशांत ने अपनी कार से शब्बीर, मसल्लाह, हफीज और जुल्फेकार को प्रयागराज से वाराणसी पहुंचाया था। वारदात के बाद यही लोग उसकी कार से वापस प्रयागराज गए थे। पुलिस का कहना है कि चालक को लूट की योजना और घटना की जानकारी थी, इसलिए उसे भी मामले में आरोपी बनाया गया है।

क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर रोकी थी चांदी

लूट की यह वारदात वाराणसी की प्रमुख आभूषण मंडी सुड़िया इलाके में हुई थी। हेमा ज्वेलर्स के संचालक विनय सोनी के मुताबिक, 16 जुलाई की शाम उनका कर्मचारी करीब 27 किलो 327 ग्राम चांदी लेकर रेशम कटरा स्थित महालक्ष्मी ज्वेलर्स जा रहा था।

चांदी के कुल 26 पीस एक झोले में रखे गए थे। कर्मचारी के साथ महालक्ष्मी ज्वेलर्स का भी एक कर्मचारी था। दोनों बाइक से गोविंदपुरा मोड़ की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में दो बाइक सवार युवकों ने उन्हें रोक लिया।

आरोपियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और दोनों कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी। उन्होंने झोले में रखे सामान के बारे में पूछा। कर्मचारियों के चांदी होने की जानकारी देने पर आरोपियों ने झोला अपने कब्जे में ले लिया।

इसके बाद उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि वे अपने मालिक को मौके पर बुलाएं और उसे क्राइम ब्रांच के पास लेकर आएं। कर्मचारियों को शक नहीं हुआ और उन्होंने घटना की जानकारी फोन पर अपने मालिक को दी।

जानकारी मिलते ही ज्वेलर्स संचालक अपने अन्य कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद जब वह पुलिस के पास पहुंचे और पूरी घटना बताई तो पता चला कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर आए दोनों व्यक्ति वास्तव में लुटेरे थे। इसके बाद लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया और पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की।

पुलिस की वर्दी और पहचान का इस्तेमाल करता है गिरोह

पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात में शामिल गिरोह कथित तौर पर ईरानी गैंग से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में घूमते रहते हैं और खुद को ईरानी समुदाय से जुड़ा बताते हैं।

गिरोह के सदस्य उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों में सक्रिय बताए जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, ये लोग कई बार अलग-अलग सामान बेचने वाले लोगों के रूप में इलाकों में घूमते हैं और कारोबारी तथा अन्य लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

इस गिरोह की सबसे बड़ी खासियत यह बताई जाती है कि इसके सदस्य पुलिस, क्राइम ब्रांच या एसटीएफ के अधिकारी बनकर लोगों को रोकते हैं। तलाशी या जांच के नाम पर उनके पास मौजूद नकदी, आभूषण या अन्य कीमती सामान अपने कब्जे में लेकर फरार हो जाते हैं।

पुलिस का कहना है कि गिरोह के सदस्य आपस में ऐसी भाषा में बातचीत करते हैं, जिसे आम लोगों के लिए समझना आसान नहीं होता। इसी वजह से सार्वजनिक स्थानों पर बातचीत के दौरान भी उनकी योजना दूसरों को आसानी से समझ नहीं आती।

कई राज्यों में फैला है नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, गिरोह के बदमाश अलग-अलग राज्यों में वारदात करने के बाद ज्यादा देर एक ही स्थान पर नहीं रुकते। लूटे गए आभूषण या अन्य सामान को ठिकाने लगाने के बाद वे दूसरे शहर अथवा राज्य की ओर निकल जाते हैं।

जांच में गिरोह के कथित सरगना अनुज डेहरा और मेहंदी हसन के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

पुलिस के मुताबिक, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित ‘ईरानी डेरा’ को इस गिरोह के प्रमुख ठिकानों में से एक माना जाता है। यहां से गिरोह के सदस्यों के बीच संपर्क और गतिविधियों के संचालन की बात सामने आती रही है।

2022 में भी वाराणसी में हुई थी इसी तरह की वारदात

पुलिस के मुताबिक, वाराणसी में इस तरह की वारदात का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कथित ईरानी गैंग पर पुलिस अधिकारी बनकर लूट करने का आरोप लग चुका है।

24 मार्च 2022 को कबीरचौरा-पियरी मार्ग पर गाजीपुर के एक कारोबारी को कथित तौर पर पुलिस चेकिंग के नाम पर रोका गया था। आरोप है कि इस दौरान कारोबारी के पास मौजूद करीब आठ लाख रुपये से भरा बैग लेकर आरोपी फरार हो गए थे।

वर्तमान मामले में पुलिस अब तक कई आरोपियों तक पहुंच चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा की रिकॉर्डिंग और गिरफ्तार आरोपियों से हुई पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि लूटी गई पूरी चांदी में से कितना माल कहां-कहां पहुंचाया गया और इस वारदात में अन्य कौन लोग शामिल थे।

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