वाराणसी (रणभेरी): आईएमएस बीएचयू के परिसर में स्थित सुश्रुत हॉस्टल में रहने वाले एनेस्थीसिया विभाग के जूनियर डॉक्टर ऋत्विक कुंदू (26) ने डि्रप में जान दे दी। उनका शव बंद कमरे से बरामत हुआ। रविवार की रात मौके पर पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने इनकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने हॉस्टल का दरवाजा तोड़ा और ऋत्विक का शव बाहर निकाला। पुलिस ने हॉस्टल में छानबीन की तो 3 पेज का सुसाइड मिला है। सुसाइड नोट में एक लड़की का नाम भी लिखा है। कहा है कि लड़की बहुत प्यार करती थी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सुसाइड नोट में लिखा था- मैं अपने घरवालों की आंखों का तारा था। शायद बहुत से लोग मेरी तरह जीवन में हार नहीं मानेंगे। लेकिन, मैं हार मान रहा हूं। मैं उन सभी से माफी मांगता हूं। जिनका मैंने दिल दुखाया है। उस लड़की को दोष न दिया जाए। वह बहुत अच्छी है। मुझे बहुत प्यार दिया। मेरे लिए बहुत कुछ किया। उसका ख्याल रखें।
जब मैं यह लिख रहा हूं, तब मुझे नहीं पता कि मुझे अपना फैसला बदल देना चाहिए या नहीं। शायद मैं मरना नहीं चाहता, लेकिन फिर भी मैं यही करूंगा। मैं शायद सबसे स्वार्थी व्यक्ति हूं। इस धरती पर रहने के लायक नहीं हूं। हो सकता है कि मेरे जैसे लोग केवल दूसरों को दुख पहुंचाने के लिए ही पैदा होते हैं।
मां, बाबा और दीदी, मुझे माफ कर देना। काश, आखिरी बार आपकी आवाज सुन पाता। सब लोग अपना ख्याल रखना। मैं पूरी जिंदगी मैं वास्तविकता से भागता रहा। आज हमेशा के लिए भाग रहा हूं। इस दुनिया में कुछ भी स्थाई नहीं है। मुझे अब समझ में आ गया है कि मैं कभी वह जीवन नहीं जी पाऊंगा। जिसका मैंने सपना देखा था।
हम सभी एक पूरी तरह खुशहाल जीवन का सपना देखते हैं। लेकिन, शायद ऐसा किसी के लिए संभव नहीं होता। जीवन बहुत छोटा है। इसे दूसरों के दुख पर हंसते हुए और छोटा मत बनाइए। हर किसी के प्रति दयालु रहें और जो कुछ आपके पास है, उसके लिए आभारी रहें। दुनिया, अलविदा।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में मौत की वजह एनेस्थीसिया की दवा का ओवरडोज लग रहा है। सही वजह पोस्टमॉर्टम के बाद पता चल पाएगी। ऋत्विव एनेस्थीसिया विभाग में तैनात थे। एमडी फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रहाथा था।

ऋत्विव कुंडू ने मेडिकल कॉलेज कोलकाता से मेडिकल में एमबीबीएस की पढ़ाई की। उसके बाद वह वाराणसी आ गए। 2025-26 बैच में एमडी की पढ़ाई कर रहे थे। उनके एक साथी ने बताया कि वह पढ़ाई में काफी ठीक थे। डॉ. ऋत्विव कुंडू सुश्रुत हॉस्टल के छठी मंजिल के एक कमरे में रहते थे। शनिवार को उन्होंने अपनी ड्यूटी की थी, लेकिन रविवार को पूरे दिन वह किसी से नहीं मिले। रविवार रात तक कोई संपर्क न होने पर साथियों को अनहोनी की आशंका हुई। बाद में ऋत्विव की लाश कमरे से बरामद हुई। पास में केनुला और दवाएं पड़ी थीं। पुलिस ने ऋत्विव के घरवालों को सूचना दी और अस्पताल पहुंची। जहां डॉक्टर ने ऋत्विव को मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
बेटे की मौत की जानकारी मिलने के बाद सोमवार सुबह करीब 11 बजे ऋत्विव के पिता दीपक काशी पहुंचे। उन्होंने बताया कि रविवार दोपहर को बेटे ने फोन किया था। उससे बात हुई थी। सभी घर वालों के हालचाल पूछा। फिर उसने कहा था कि अब मैं खाना खाने जा रहा हूं। मैंने पूछा कि तुम कैसे हो? तो मेरे बेटे ने कहा कि मैं ठीक हूं। यहां सबकुछ ठीक है। उसके बाद कोई कॉल नहीं आया। फिर रात में बीएचयू प्रशासन का फोन कॉल आया। दीपक SBI में बैंक मैनेजर थे। अब रिटायर हो चुके हैं और घर पर ही रहते हैं।
लंका थाना प्रभारी राजकुमार वर्मा ने बताया-प्राक्टोरियल बोर्ड की तरफ से सूचना मिलने पर नगवां चौकी के प्रभारी को मौके पर भेजा गया। कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें लिखी बातों की जांच की जाएगी। फिलहाल शव को कब्जे में लेकर शवगृह में रखवाया है। परिजनों को सूचना दे दी गई हैं। आसपास के कमरों में रहने वाले छात्रों से पूछताछ की गई है।
