(रणभेरी): शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद शनिवार को जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को बधाई दी, छात्र एकता के समर्थन में नारे लगाए और राष्ट्रगान गाकर अपनी खुशी जाहिर की।
इस दौरान नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद कथित तौर पर जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया।
उधर, आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक की तैयारी शुरू हो गई है। बातचीत के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ सरकारी पक्ष के अन्य प्रतिनिधि कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंच चुके हैं। दूसरी ओर, संगठन की ओर से अभिजीत दीपके और सौरभ दास सहित अन्य पदाधिकारी बैठक में शामिल होने वाले हैं।

बैठक से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आंदोलन का पहला बड़ा लक्ष्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि कई लोग दावा कर रहे थे कि सरकार किसी मंत्री से इस्तीफा नहीं लेगी, लेकिन छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन ने यह संभव कर दिखाया।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उनके मुताबिक संगठन की कई अहम मांगें अब भी लंबित हैं। इनमें पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता, आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी और प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच व उचित कार्रवाई शामिल है।
अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश की परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लड़ रहे हैं और जब तक सभी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन को पूरी तरह खत्म नहीं माना जाएगा।
जंतर-मंतर पर दिनभर बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक मौजूद रहे। इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद वहां उत्सव जैसा माहौल बन गया। कई छात्रों ने इसे युवाओं की एकजुटता की जीत बताया, जबकि कुछ ने कहा कि यह केवल संघर्ष की पहली सफलता है और आगे की लड़ाई अभी बाकी है।
अब सभी की नजर सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच होने वाली बैठक पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में आंदोलन की शेष मांगों पर विस्तार से चर्चा होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि बैठक सकारात्मक रही तो लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन के अगले चरण को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।
