नेपाल में ग्लेशियर टूटने का खौफनाक वीडियो सामने आया, तबाही के तीन दिन बाद दिखा 800 मीटर बर्फीला हिस्सा ढहता हुआ

नेपाल में ग्लेशियर टूटने का खौफनाक वीडियो सामने आया, तबाही के तीन दिन बाद दिखा 800 मीटर बर्फीला हिस्सा ढहता हुआ

(रणभेरी): नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और उसके बाद आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इस घटना के करीब तीन दिन बाद अब ग्लेशियर टूटने का एक वीडियो सामने आया है। बताया जा रहा है कि तिब्बत में मौजूद टूर गाइडों के एक समूह ने ऊंचाई वाले इलाके से इस पूरी घटना को अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया।

सामने आए वीडियो में नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास बर्फ से ढकी ऊंची पर्वत चोटियां और ग्लेशियर नजर आते हैं। कुछ ही क्षणों में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे की ओर खिसकता दिखाई देता है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि करीब 800 मीटर लंबा बर्फ और चट्टानों का हिस्सा टूटकर घाटी में जा गिरा।

ग्लेशियर के टूटने के साथ ही भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे की तरफ बढ़ता है। कुछ ही देर में पूरा क्षेत्र धूल और मलबे के गुबार से ढक जाता है। कैमरे में घाटी की ओर बहता पानी भी दिखाई देता है, जो बाद में आई बाढ़ की भयावहता का संकेत देता है।

नीचे पहुंचे तो रास्ते हो चुके थे बंद

वीडियो रिकॉर्ड करने वाला टूर गाइड समूह जब बाद में नीचे की तरफ पहुंचा, तो उन्हें कई रास्ते बंद मिले। स्थानीय इलाके में भारी मलबा जमा था और सामान्य आवाजाही प्रभावित हो चुकी थी।

इसके बाद समूह को जानकारी मिली कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ ने आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया है। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग बाधित हो गए, जबकि लोगों के सामने सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई।

आपदा में मौतों और लापता लोगों की संख्या बढ़ी

नेपाल और तिब्बत में हुई इस प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आपदा में अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 2,500 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है।

लापता लोगों में बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की भी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार करीब 320 भारतीय अभी लापता हैं। इसके अलावा लगभग 400 भारतीय नागरिकों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी है।

बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त रास्ते और जमा हुए मलबे के कारण रेस्क्यू टीमों को कई जगह मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

नेपाल के गृहमंत्री भी राहत अभियान में पहुंचे

आपदा की गंभीरता के बीच नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरंग खुद राहत और बचाव अभियान में शामिल हुए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया और बचाव दल के साथ अभियान में हिस्सा लिया।

बताया गया कि गृहमंत्री सुरंग के भीतर भी पहुंचे, जहां राहत एवं बचावकर्मी फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने बचाव टीमों के साथ मिलकर अभियान की स्थिति का जायजा लिया और लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिशों में सहयोग किया।

सरकार की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और लापता लोगों की तलाश करना है। इसके साथ ही आपदा से प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने का काम भी चल रहा है।

आधे घंटे तक बिजली के तार से लटके रहे रामबचन

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा त्रिशूली बाजार की एक घटना से लगाया जा सकता है। यहां मिठाई की दुकान में काम करने वाले रामबचन साह अचानक आई बाढ़ की तेज धारा में बह गए थे।

रामबचन के मुताबिक, पानी की तेज धार उन्हें अपने साथ बहाकर ले गई। किसी तरह उन्होंने बिजली के एक तार को पकड़ लिया और करीब 30 मिनट तक उसी के सहारे लटके रहे। इसी वजह से उनकी जान बच सकी।

बाढ़ से बाहर निकलने के बाद रामबचन की हालत बेहद खराब थी। उनके शरीर पर कीचड़ लगा हुआ था। उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई, जिसमें वह पूरी तरह कीचड़ से सने दिखाई दे रहे थे।

हालांकि रामबचन सुरक्षित बच गए, लेकिन जिस दुकान में वह काम करते थे वहां मौजूद संगीता, उनके बेटे राहुल और कर्मचारी बिनोद भगत का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार और स्थानीय लोग उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

राहत अभियान के सामने बड़ी चुनौती

ग्लेशियर टूटने के बाद हुए भूस्खलन और बाढ़ ने कई इलाकों में प्राकृतिक और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है। मलबे के कारण रास्ते बंद होने से राहत दलों की आवाजाही मुश्किल हो रही है।

लापता लोगों की संख्या अधिक होने के कारण बचाव एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक तेजी से पहुंचना और लोगों का पता लगाना है। वहीं, सीमा से जुड़े क्षेत्रों में खराब भौगोलिक परिस्थितियां अभियान को और कठिन बना रही हैं।

ग्लेशियर टूटने का सामने आया वीडियो इस आपदा की शुरुआत की भयावह तस्वीर दिखाता है। कुछ सेकंड के भीतर हजारों टन बर्फ और चट्टानों के नीचे की ओर आने से पैदा हुई स्थिति ने यह साफ कर दिया कि ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं कितनी तेजी से बड़े संकट में बदल सकती हैं।

फिलहाल बचाव एवं राहत अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। प्रभावित परिवारों की नजर अब इस बात पर है कि मलबे और बाढ़ के बीच उनके अपनों का कोई सुराग मिल सके।

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