- सामाजिक कार्यकर्ता ने लगाया आरोप : नौकरी, एडमिशन और इलाज के नाम पर लोगों को बनाता है शिकार
- प्रोफेसरों समेत दर्जनों लोग ठगी के शिकार, कई पीड़ित अभी भी खामोश
- शिकायत के बाद सामने आया संगठित गिरोह का जाल, पुलिस को सौंपे गए साक्ष्य
वाराणसी (रणभेरी सं.)। काशी में एक बड़े संगठित ठगी गिरोह का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसमें बीएचयू में नौकरी दिलाने, प्रतिष्ठित स्कूलों में एडमिशन कराने और सरकारी-निजी कार्यों को कराने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ऐंठने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस मामले में रामनगर निवासी हरेंद्र शुक्ला को मुख्य सरगना बताया जा रहा है, जिसके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अवधेश दीक्षित ने थाना रामनगर में लिखित शिकायत दी है।
डॉ. दीक्षित के अनुसार, आरोपी लंबे समय से सुनियोजित तरीके से भोले-भाले लोगों को अपने झांसे में लेकर उनसे मोटी रकम वसूलता रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में आरोपी ने उनसे 12 हजार उधार लिए थे, लेकिन जब पैसे वापस मांगे गए तो उसने गाली-गलौज, धमकी और मारपीट पर उतारू होने जैसा व्यवहार किया। इसी घटना के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि हरेंद्र शुक्ला खुद को प्रभावशाली व्यक्ति बताकर लोगों को भरोसे में लेता था और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। इसके अलावा प्रतिष्ठित विद्यालयों में प्रवेश दिलाने, सरकारी कार्यालयों में काम करवाने और इलाज व दवा के नाम पर सहानुभूति बटोरकर पैसे वसूलने का सिलसिला भी जारी था।
प्रार्थना पत्र में कई पीड़ितों के नाम और उनसे ठगी गई रकम का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। बजरडीहा निवासी वसीम से 1.52 लाख, पांडेयपुर के मनीष चौहान से 5 लाख, पड़ाव के अनुपम यादव से 25 हजार, आईआईटी-बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय से 15 हजार, आईएमएस-बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. टी.एम. महापात्र से 15 हजार, संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव द्विवेदी से 15 हजार, बी.के. सिंह से 18 हजार, केशव ताम्बूल भंडार से लगभग 1 लाख और एक मृतक की पुत्री के एडमिशन के नाम पर 20 हजार की ठगी का आरोप लगाया गया है। स्वयं शिकायतकर्ता डॉ. दीक्षित से भी 12 हजार लिए गए।
शिकायतकर्ता का दावा है कि यह सूची केवल एक झलक है। इसके अलावा चार दर्जन से अधिक अन्य लोगों से भी लाखों रुपये की ठगी की गई है, जिससे कुल रकम 60 लाख से अधिक पहुंचने का अनुमान है।
कई पीड़ित अब भी आरोपी के डर से सामने नहीं आ पा रहे हैं, जबकि कुछ ने अब शिकायत के बाद हिम्मत जुटाकर संपर्क करना शुरू किया है। गंभीर बात यह भी सामने आई है कि आरोपी जब किसी से पैसे वापस मांगने पर घिरता था, तो वह गुंडागर्दी और मारपीट की धमकी देता था। इतना ही नहीं, अपनी पत्नी के माध्यम से छेड़छाड़ के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर लोगों को डराता था। खुद को पत्रकार बताकर भी वह दबाव बनाने और भयादोहन करने का प्रयास करता था।
डॉ. अवधेश दीक्षित ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले से जुड़े सभी साक्ष्य पुलिस प्रशासन को सौंप दिए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि समाज में भय और अविश्वास फैलाने वाला गंभीर मामला है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और उसे जल्द गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। रामनगर थाना प्रभारी ने बताया कि हमने तहरीर की जांच के लिए चौकी प्रभारी को बता दिया है। मामला सिविल नेचर का है, क्रिमिनल नेचर का नहीं, कोर्ट में परिवारवाद दायर करें। वैसे तहरीर की जांच की जा रही है।
