वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गिने जाने वाले काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के परिसर में एक बार फिर नशे और असामाजिक गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परिसर को नशामुक्त बनाए रखने के दावों के बीच कुछ सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी मात्रा में शराब की बोतलें, बीयर कैन, तंबाकू उत्पादों के रैपर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने से सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के मधुबन क्षेत्र, चिल्ड्रेन पार्क और एम्फीथिएटर मैदान के आसपास छात्रों को ऐसे कई प्रमाण मिले हैं, जो इन स्थानों पर नशीले पदार्थों के सेवन और असामाजिक गतिविधियों की ओर संकेत करते हैं। छात्रों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से निगरानी की कमी बनी हुई है, जिसका फायदा कुछ लोग उठा रहे हैं।
सार्वजनिक स्थलों पर मिला संदिग्ध सामान
छात्रों द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान एम्फीथिएटर मैदान के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय के आसपास इंजेक्शन, सिगरेट के अवशेष और तंबाकू उत्पाद पाए गए। वहीं मधुबन पार्क के पीछे के हिस्से और चिल्ड्रेन पार्क में शराब की खाली बोतलें, बीयर के डिब्बे, कांच के ग्लास, गुटखा और तंबाकू के पाउच सहित बड़ी मात्रा में कचरा बिखरा हुआ मिला।
स्थानीय छात्रों का आरोप है कि पार्कों में घूमने और पिकनिक मनाने आने वाले कुछ लोगों की गतिविधियों के कारण ये स्थान धीरे-धीरे अव्यवस्था और अनुशासनहीनता के केंद्र बनते जा रहे हैं। उनका कहना है कि इन इलाकों में सुरक्षा कर्मियों की नियमित मौजूदगी नहीं दिखाई देती, जिससे ऐसे लोगों के हौसले बढ़ रहे हैं।

कुछ दिनों में इकट्ठा हुआ भारी मात्रा में कचरा
छात्रों के अनुसार, केवल दो से तीन दिनों के भीतर मधुबन क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कचरा एकत्र हुआ। सफाई अभियान के दौरान लगभग दस शराब की बोतलें, बीस से अधिक बीयर कैन, डेढ़ सौ से ज्यादा प्लास्टिक की बोतलें, पांच सौ से अधिक गुटखा और तंबाकू उत्पादों के रैपर तथा सौ से ज्यादा सिगरेट और तंबाकू के खाली पैकेट मिले।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुछ छात्रों ने स्वयं आगे बढ़कर क्षेत्र की सफाई कराई। अभियान के दौरान एकत्रित कचरे को विश्वविद्यालय के संबंधित स्वच्छता विभाग को सौंप दिया गया। छात्रों का कहना है कि यदि नियमित निगरानी और सफाई व्यवस्था प्रभावी होती तो इतनी बड़ी मात्रा में कचरा जमा नहीं होता।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे प्रश्न
छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध नहीं दिखाई देते। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड की सक्रिय निगरानी का अभाव है। इससे न केवल परिसर की स्वच्छता प्रभावित हो रही है बल्कि छात्रों के लिए असुरक्षा का माहौल भी बन सकता है।
छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय की पहचान एक शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में है। ऐसे में पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर इस प्रकार की सामग्री का मिलना चिंताजनक है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो समस्या और गंभीर हो सकती है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित गश्त बढ़ाने, सुरक्षा कर्मियों की संख्या में वृद्धि करने और प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाकर निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
साथ ही छात्रों ने पार्कों में नियमित सफाई अभियान चलाने और बाहरी लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने की आवश्यकता भी जताई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रशासन और छात्रों दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा
मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि परिसर में नियमित पेट्रोलिंग की व्यवस्था पहले से मौजूद है और संबंधित क्षेत्र भी निगरानी के दायरे में आते हैं। प्रशासन के अनुसार विभिन्न समयों पर गश्त की जाती है तथा निर्धारित समय के बाद पार्कों को बंद कर दिया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में नशे या असामाजिक गतिविधियों की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।
बढ़ी चिंता, समाधान की प्रतीक्षा
विश्वविद्यालय परिसर में मिले इन प्रमाणों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है। छात्रों का मानना है कि समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो परिसर की गरिमा और सुरक्षा दोनों को बनाए रखा जा सकता है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है कि वह इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेकर समाधान की दिशा में कदम उठाता है।
