- गंगा आरती के नाम पर श्रद्धालुओं से जबरन पैसे मांगने का आरोप
- महाराष्ट्र से आए 30 श्रद्धालुओं ने लगाया आरोप- कुर्सी के नाम पर 100-200 रुपये की अवैध वसूली
- रसीद नहीं, पहचान नहीं, विरोध करने पर धमकाने और हटाने की शिकायत
- घाटों पर सक्रिय है अनौपचारिक वसूली तंत्र, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
वाराणसी (रणभेरी): काशी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर गंगा आरती के दौरान अव्यवस्था और कथित वसूली का मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर घाटों की व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र से आए श्रद्धालुओं के एक समूह ने आरोप लगाया है कि गंगा आरती देखने के दौरान उनसे जबरन कुर्सी के नाम पर पैसे मांगे गए और विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
रणभेरी को प्राप्त वीडियो के अनुसार, महाराष्ट्र से करीब 30 श्रद्धालुओं का जत्था काशी दर्शन के लिए वाराणसी पहुंचा था। इस समूह ने सुबह-ए-बनारस और शाम की गंगा आरती में शामिल होने की योजना बनाई थी। श्रद्धालुओं का कहना है कि अस्सी घाट पहुंचने के बाद जैसे ही वे आरती देखने के लिए बैठे, वहां पहले से मौजूद कुछ लोगों ने उनसे प्रति कुर्सी 100 से 200 रुपये की मांग शुरू कर दी।
श्रद्धालुओं के मुताबिक, जब उन्होंने इस भुगतान का विरोध किया और घाट की सीढ़ियों या खुले स्थान पर बैठकर आरती देखने की इच्छा जताई, तो उन्हें वहां से भी जबरन हटाया गया। आरोप है कि पैसे मांगने वाले व्यक्तियों ने न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि विरोध करने पर डराने-धमकाने वाली भाषा का इस्तेमाल भी किया, जिससे समूह में शामिल महिलाएं और बुजुर्ग काफी असहज हो गए।

सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि कथित वसूली करने वाले लोगों के पास न तो कोई अधिकृत पहचान पत्र था और न ही वे भुगतान के बदले किसी प्रकार की रसीद दे रहे थे। ऐसे में यह पूरी व्यवस्था अनौपचारिक और संदिग्ध नजर आई। श्रद्धालुओं का कहना है कि गंगा आरती जैसे पवित्र आयोजन को कुछ लोगों ने कमाई का जरिया बना दिया है, जिससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच रही है।
पीड़ितों ने बताया कि वे काशी की आध्यात्मिक गरिमा और ‘अतिथि देवो भव:’ की परंपरा से प्रभावित होकर यहां आए थे, लेकिन इस अनुभव ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। उनका कहना है कि सार्वजनिक घाटों पर बैठने के लिए पैसे मांगना न केवल गलत है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक पहचान के विपरीत भी है।
इस घटना ने घाटों पर सक्रिय कथित वसूली तंत्र की ओर इशारा किया है, जो बिना किसी आधिकारिक अनुमति के श्रद्धालुओं से पैसे वसूल रहा है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि ऐसे मामलों की शिकायत पहले भी सामने आती रही है, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में यह सिलसिला जारी है।
श्रद्धालुओं ने स्थानीय प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि घाटों पर व्यवस्था को पारदर्शी और नियंत्रित किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
वहीं, इस पूरे मामले ने प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गंगा आरती जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन के दौरान यदि इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या काशी की पहचान को धूमिल करने वाले ऐसे तत्वों पर लगाम लग पाती है या नहीं।
जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई : एसीपी
अस्सी घाट पर गंगा आरती के नाम पर कथित वसूली के वायरल वीडियो ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने स्पष्ट किया है कि वीडियो की सत्यता और समय की पुष्टि की जा रही है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। एसीपी ने बताया कि पुलिस टीम वायरल वीडियो के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो हाल का है या पुराना, और उसमें दिखाई जा रही घटनाएं वास्तविक हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों का स्पष्ट होना जरूरी है।

गौरव कुमार ने कहा कि वाराणसी एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन नगरी है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे में गंगा आरती जैसे पवित्र आयोजन के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
