वाराणसी में फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 84 घाटों का संपर्क पहले से टूटा; पिंडदान के लिए जगह की कमी

वाराणसी में फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 84 घाटों का संपर्क पहले से टूटा; पिंडदान के लिए जगह की कमी

वाराणसी (रणभेरी): मौसम में एक बार फिर बदलाव देखने को मिल रहा है। गुरुवार सुबह शहर का तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति लगभग 8 किलोमीटर प्रति घंटे रही, जबकि आर्द्रता 69 प्रतिशत दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 99 के स्तर पर रहा।

मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, आने वाले सात दिनों में बारिश के आसार नहीं हैं और आसमान में बादल छाने की संभावना भी कम है। इस अवधि में अधिकतम तापमान में करीब 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, सुबह के वक्त हल्की ठंडक महसूस होती रहेगी।

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई मुश्किलें

गंगा के जलस्तर में फिर से वृद्धि होने के कारण घाटों पर हालात बदलने लगे हैं। जिन घाटों पर पानी कम होने के बाद सीढ़ियों और प्लेटफार्मों की सफाई शुरू कर दी गई थी, वहां दोबारा पानी पहुंच गया है।

वाराणसी में फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 84 घाटों का संपर्क पहले से टूटा; पिंडदान के लिए जगह की कमी

नमो घाट के प्लेटफार्म और अस्सी घाट की सीढ़ियों तक पानी पहुंचने से सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। पहले से ही करीब 84 घाटों का संपर्क बाधित है। अब जलस्तर बढ़ने के कारण उन घाटों पर भी दिक्कत बढ़ गई है, जहां बाढ़ का पानी हटने के बाद सफाई कराई गई थी। पानी दोबारा पहुंचने से घाटों पर गाद और कचरा जमा होने की आशंका है। ऐसे में जलस्तर सामान्य होने के बाद संबंधित स्थानों पर फिर से सफाई करनी पड़ेगी।

पितृपक्ष में अनुष्ठान के लिए जगह की कमी

पितृपक्ष के चलते घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। दूसरी ओर, जलस्तर बढ़ने से उपलब्ध जगह लगातार कम होती जा रही है। इसका असर पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर पड़ रहा है। सीमित स्थान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से व्यवस्थाएं बनाए रखना प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

वाराणसी में फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 84 घाटों का संपर्क पहले से टूटा; पिंडदान के लिए जगह की कमी

दो महीने से नाव संचालन प्रभावित, नाविकों की बढ़ी चिंता

गंगा के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव और घाटों की बदली स्थिति का सीधा असर नाविकों के रोजगार पर पड़ा है। नाविकों के मुताबिक, करीब दो महीने से नाव संचालन प्रभावित है, जिसके कारण उनकी आमदनी पर काफी असर पड़ा है।

नाविकों का कहना है कि लंबे समय से काम प्रभावित होने के कारण परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है। वे गंगा के जलस्तर के जल्द स्थिर होने और घाटों की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि नावों का संचालन फिर से नियमित रूप से शुरू हो सके।

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