(रणभेरी): प्रयागराज क्षेत्र में श्रद्धालुओं से कथित तौर पर रकम वसूले जाने का वीडियो सामने आने के बाद परिवहन विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में दारागंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर आरटीओ प्रवर्तन सत्येंद्र प्रकाश सिंह की शिकायत पर दर्ज हुई है।
वायरल वीडियो में उत्तर प्रदेश सरकार लिखी एक बोलेरो के अंदर एक व्यक्ति नोट गिनता दिखाई दे रहा है। वाहन के पास एक अन्य व्यक्ति खड़ा नजर आता है। कुछ देर बाद वाहन के अंदर बैठा व्यक्ति उससे कुछ कहता है, जिसके बाद बाहर खड़ा व्यक्ति वहां से चला जाता है। वीडियो के पीछे कुछ बसें भी दिखाई दे रही हैं और उनके यात्री सड़क पर खड़े नजर आते हैं।
सरकारी वाहन में निजी व्यक्ति के होने पर सवाल
वीडियो सामने आने के बाद परिवहन विभाग के वाहन की पहचान यात्री कर अधिकारी रणविजय सिंह चौहान को आवंटित वाहन के रूप में हुई। वाहन पर लाल-नीली बत्ती और हूटर भी दिखाई दे रहा है।
मामले में आरटीओ प्रवर्तन की ओर से दी गई शिकायत में बताया गया कि वीडियो में नजर आ रहा पुष्पेंद्र सिंह सरकारी वाहन संख्या UP 32 FG 3603 में बैठा था। शिकायत में सोशल मीडिया पर वीडियो को रिश्वत की रकम से जोड़कर प्रसारित किए जाने का भी उल्लेख किया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

अधिकारी के बयान से बढ़े सवाल
मामले में बुधवार को एआरटीओ प्रवर्तन की ओर से बताया गया कि वीडियो में दिखाई दे रहा पुष्पेंद्र सिंह यात्री कर अधिकारी का निजी चालक है। अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि वीडियो में जिस रकम को गिना जा रहा था, वह चालान से संबंधित राशि थी।
हालांकि, इसी बयान के बाद पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि रकम वास्तव में चालान की थी, तो सरकारी वाहन में मौजूद निजी चालक उसे क्यों गिन रहा था? उस समय संबंधित अधिकारी वाहन में मौजूद थे या नहीं? और यदि रकम वैध चालान की थी, तो इसी घटनाक्रम के आधार पर निजी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है।
सतना से आए श्रद्धालुओं की बस होने का दावा
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ दावा किया गया कि बस में मध्य प्रदेश के सतना से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे थे। बताया गया कि श्रद्धालु संगम में पिंडदान के लिए आए थे और वापस लौटते समय उनकी बस को रोककर कथित तौर पर पैसे लिए गए। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही रकम किस वजह से ली गई थी और वह किस मद से संबंधित थी, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
स्लीपर बसों की जांच के दौरान सामने आया मामला
प्रयागराज में इन दिनों स्लीपर बसों के खिलाफ परिवहन विभाग का विशेष अभियान चल रहा है। नोएडा में स्लीपर बस में आग लगने की घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर ऐसे वाहनों की जांच तेज की गई है। इसी अभियान के तहत प्रयागराज आने-जाने वाली स्लीपर बसों की भी जांच की जा रही है। इनमें दूसरे राज्यों से संगम और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर चलने वाली बसें भी शामिल हैं।
पुलिस जुटा रही वीडियो से जुड़े तथ्य
कर्नलगंज थाना प्रभारी हरिकेश राय के अनुसार मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस वीडियो में नजर आने वाले लोगों की पहचान, सरकारी वाहन में निजी व्यक्ति की मौजूदगी और रकम के लेन-देन से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि वीडियो में दिखाई दे रही रकम वास्तव में चालान के रूप में जमा की जा रही थी या उसके पीछे कोई अन्य वजह थी। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
