वाराणसी (रणभेरी): महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 48वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए देश के भविष्य, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक जीवन में मर्यादित व्यवहार और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि देश का नेतृत्व करने की इच्छा रखने वाले लोगों का आचरण ऐसा होना चाहिए, जिससे समाज को सकारात्मक संदेश मिले। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए कहा कि जंतर-मंतर पर जो दृश्य सामने आए, उन्हें पूरे देश ने देखा। सार्वजनिक मंचों पर जिस प्रकार की भाषा और व्यवहार देखने को मिला, वह गंभीर चिंतन का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज में संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना सबसे अधिक आवश्यक है और विशेष रूप से युवाओं को इन मूल्यों को अपनाकर आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और सोच का निर्माण भी करती है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यही छात्र देश के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे, इसलिए उन्हें ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
समारोह का आयोजन वाराणसी स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में किया गया, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विभिन्न संकायों के कुल 26 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान कीं। इनमें 17 विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दो-दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
पुरस्कार वितरण के दौरान राज्यपाल प्रत्येक छात्र से व्यक्तिगत रूप से मिलीं। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के बारे में बातचीत की तथा उन्हें आगे भी मेहनत और ईमानदारी के साथ अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित किया। इस आत्मीय संवाद ने समारोह को और भी विशेष बना दिया।
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, मुंबई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कैप्टन बी.के. त्यागी उपस्थित रहे। वहीं उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आनंद त्यागी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए चार महत्वपूर्ण संकल्प दिलाए। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज सेवा, नैतिक आचरण, राष्ट्र निर्माण और निरंतर ज्ञान अर्जित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों की सराहना की और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। पूरे कार्यक्रम में शिक्षा, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा में रहे।
दीक्षांत समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
