वाराणसी (रणभेरी): शहर के पुराने इलाकों में जर्जर भवनों की स्थिति एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के देवनाथपुरा में बुधवार को एक पुराने मकान को गिराने के दौरान उसका हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गया। मलबे की चपेट में आने से काम में लगे तीन मजदूर घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
हादसा देवनाथपुरा में नवसंघ क्लब के आसपास उस संकरी गली में हुआ, जो जंगमबाड़ी इलाके को दशाश्वमेध क्षेत्र से जोड़ती है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मकान काफी समय से खराब हालत में था और बुधवार को उसे गिराने का काम चल रहा था। इसी दौरान भवन का एक हिस्सा अचानक ढह गया और वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
रास्ते से गुजर रहे लोगों की बची जान
घटना जिस रास्ते पर हुई, वहां आमतौर पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। संयोग से मकान का हिस्सा गिरने के समय मलबे के नीचे या आसपास कोई राहगीर नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उसी वक्त कोई व्यक्ति वहां से गुजर रहा होता तो हादसा काफी गंभीर हो सकता था।
मकान को मोहम्मद स्वालेह का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार भवन में फिलहाल कोई व्यक्ति निवास नहीं कर रहा था। जर्जर स्थिति को देखते हुए उसे गिराने का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान अचानक भवन का हिस्सा गिर पड़ा।
हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। राहत एवं बचाव की कार्रवाई करते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण भी किया।
पुलिस ने बताया, मकान बेहद जर्जर था
दशाश्वमेध थाना प्रभारी के अनुसार दोपहर में मकान संख्या डी-31/297 के एक हिस्से के गिरने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही मदनपुरा चौकी प्रभारी को मौके पर भेजा गया। जांच में भवन की हालत बेहद जर्जर मिली। पुलिस के मुताबिक मकान में वर्तमान समय में कोई व्यक्ति नहीं रह रहा था।
पुलिस ने बताया कि भवन का कुछ हिस्सा गिरा है और घटना में किसी राहगीर की मौत या अन्य जनहानि की सूचना नहीं है। हादसे के बाद मार्ग पर मलबा फैल जाने से आवागमन प्रभावित हुआ और रास्ता अवरुद्ध हो गया।
सभासद ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
हादसे की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय सभासद चंद्रनाथ मुखर्जी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर स्थानीय लोगों से घटना की जानकारी ली और घायलों के बारे में जानकारी हासिल की।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि देवनाथपुरा और आसपास के पुराने मोहल्लों में कई भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे भवनों को लेकर पहले भी प्रशासन को जानकारी दी जाती रही है, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से खतरा बना रहता है।
मंदिर जाने वाले रास्ते पर भी बढ़ा खतरा
स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस स्थान पर मकान गिरा है, वह हवेली से देवनाथपुर स्थित शिवा काली मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के आसपास है। भवन का हिस्सा गिरने के बाद सड़क पर मलबा फैल गया, जिससे रास्ते से आने-जाने में लोगों को परेशानी हुई।
लोगों ने मांग की है कि मलबे को तत्काल हटाने के साथ आसपास मौजूद दूसरे पुराने और कमजोर भवनों का भी सर्वे कराया जाए। उनका कहना है कि भवनों की स्थिति की जांच कर ऐसे मकानों को चिन्हित किया जाना चाहिए, जिनसे लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
विश्वनाथ मंदिर के पास भी चार दिन पहले गिरा था छज्जा
जर्जर भवनों को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के नजदीक भी कुछ दिन पहले भवन का छज्जा गिरने की घटना सामने आई थी। मंदिर परिसर के गेट नंबर-1 यानी सिंह द्वार के समीप शंकराचार्य मंदिर की दो मंजिला इमारत का एक छज्जा चार दिन पहले अचानक नीचे आ गिरा था।
गनीमत रही कि छज्जा गिरने के वक्त उसके नीचे कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है। यहां दिनभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही रहती है। ऐसे में भवन का कोई हिस्सा गिरने से गंभीर हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित इमारत की हालत भी काफी पुरानी और कमजोर है। उनका दावा है कि भवन का एक अन्य हिस्सा भी जोखिम की स्थिति में है। लोगों ने प्रशासन से भवन का तकनीकी निरीक्षण कराने और जरूरत पड़ने पर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत, हटाने अथवा संवेदनशील क्षेत्र में बैरिकेडिंग कराने की मांग की है।
पुराने शहर में जर्जर भवनों पर कार्रवाई की मांग
वाराणसी के पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई मकान दशकों पुराने हैं। संकरी गलियों और लगातार बढ़ती आबादी के बीच कमजोर भवनों का खतरा स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। देवनाथपुरा की घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे भवनों की समय रहते पहचान और सुरक्षा जांच क्यों नहीं की जाती।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को अभियान चलाकर जर्जर मकानों की सूची तैयार करनी चाहिए। जिन भवनों से तत्काल खतरा है, वहां लोगों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग की जाए और भवन मालिकों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।
देवनाथपुरा में हुए हादसे में फिलहाल किसी राहगीर की जान नहीं गई, लेकिन तीन मजदूरों के घायल होने की घटना ने पुराने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। वहीं विश्वनाथ मंदिर के पास छज्जा गिरने की घटना भी यह संकेत देती है कि शहर के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में जर्जर इमारतों की जांच को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
