वाराणसी (रणभेरी): महान पार्श्वगायक मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर डर्बी शायर क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद ‘जादूगर’ के नेतृत्व में पितरकुंडा स्थित प्राचीन कुंड पर मछलियों को चारा खिलाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने मोहम्मद रफी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके अमूल्य योगदान को याद किया और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्लब अध्यक्ष शकील अहमद ‘जादूगर’ ने कहा कि मोहम्मद रफी भारतीय सिनेमा के ऐसे महान पार्श्वगायक थे, जिनकी मधुर और भावपूर्ण आवाज आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है। उन्होंने बताया कि रफी साहब का जन्म 24 दिसंबर 1924 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के कोटला सुल्तान सिंह (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आकर बस गया और उन्होंने मुंबई में रहकर हिंदी फिल्म संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि रफी साहब ने अपने लंबे संगीत सफर में हिंदी सिनेमा के अनेक दिग्गज अभिनेताओं के लिए यादगार गीत गाए। उनकी आवाज परदे पर धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, शम्मी कपूर, दिलीप कुमार, राजेंद्र कुमार, राजेश खन्ना, जितेंद्र सहित कई बड़े सितारों की पहचान बन गई। उन्होंने रोमांटिक गीतों से लेकर देशभक्ति, सूफी, कव्वाली, भजन और शास्त्रीय संगीत पर आधारित रचनाओं तक हर विधा में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
शकील अहमद ने कहा कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान देशभक्ति का जज़्बा जगाने वाले गीतों में मोहम्मद रफी की आवाज ने लोगों के भीतर नई ऊर्जा का संचार किया। “कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो” जैसे गीत आज भी देशभक्ति की भावना को प्रबल करते हैं। वहीं “ओ दुनिया के रखवाले”, “सुख के सब साथी, दुख में न कोई” और “आया सावन झूम के” जैसे उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि 31 जुलाई 1980 को मोहम्मद रफी ने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी सुरीली आवाज आज भी हर पीढ़ी के दिलों में गूंज रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि भारतीय संगीत जगत में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत “भारत रत्न” से सम्मानित किया जाना चाहिए। साथ ही उनके नाम पर एक विशेष रेलगाड़ी संचालित करने और उनके परिवार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने की भी मांग की।
अपने संबोधन के दौरान शकील अहमद ने रफी साहब से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान एक संगीत कार्यक्रम में श्रोताओं की विशेष फरमाइश पर रफी साहब ने “बड़ी दूर से आए हैं, प्यार का तोहफा लाए हैं” गीत प्रस्तुत किया था, जिसे सुनकर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग रफी साहब की लोकप्रियता और दोनों देशों के संगीत प्रेमियों के बीच उनके प्रति सम्मान का प्रमाण है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने मोहम्मद रफी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उनके अमर गीतों को सुनकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर गुफरान अहमद, चिंतित बनारसी, मोहम्मद इश्तियाक अंसारी, चंगू, मेनू, सरोज, जावेद हुसैन, बबलू जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
