वाराणसी (रणभेरी): विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के आयोजन को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंचने लगी हैं। 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी से रामलीला का विधिवत शुभारंभ होगा। इससे पहले मंगलवार को परंपरागत धार्मिक अनुष्ठानों के तहत द्वितीय श्री गणेश पूजन संपन्न कराया गया। लगभग दो घंटे तक चले पूजन, संकल्प और मानस पाठ के दौरान पूरा रामनगर भक्तिरस में डूबा रहा।
अनुष्ठान की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। रामायणी दल ने नारद वाणी में विनयपत्रिका की पंक्तियों का सस्वर गायन किया। गणपति की स्तुति और मंगलाचरण के दौरान मौजूद श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। इसके बाद तुलसीदास की विनय से जुड़ी चौपाई का पाठ करते हुए भगवान राम और माता सीता के हृदय में वास की प्रार्थना की गई।
निर्विघ्न आयोजन और जनकल्याण की कामना
रामनगर रामलीला की पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार रामलीला अधिकारी पाठक जी ने जजमान की भूमिका निभाई। पंडित रामनारायण पांडेय ने वैदिक विधि से संकल्प पूजन कराया। इस दौरान रामलीला के शांतिपूर्ण और सफल आयोजन के साथ राजा, प्रजा, लीला देखने-सुनने आने वाले श्रद्धालुओं तथा आयोजन से जुड़े सभी लोगों के सुख-समृद्धि की कामना की गई।
पंडित रामनारायण पांडेय और शांत नारायण पांडेय ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच पूजन की प्रक्रिया पूरी कराई। धार्मिक अनुष्ठान में रामलीला के पंच स्वरूप श्रीराम, सीता, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के अलावा वशिष्ठ, दशरथ, रामलीला व्यास, रामायणी दल सहित अन्य पात्र मौजूद रहे।

नारद वाणी में हुआ मानस पाठ
गणेश पूजन के उपरांत रामचरितमानस के बालकांड के मंगलाचरण से लेकर सात दोहों तक का पाठ नारद वाणी में किया गया। रामायणी दल द्वारा चौपाइयों और पदों के गायन ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। बड़ी संख्या में मौजूद लीला प्रेमियों ने श्रद्धा के साथ मानस पाठ सुना।
आयोजन के दौरान रामकथा के माध्यम से मर्यादा, संस्कार, आस्था और जीवन मूल्यों का संदेश भी दिया गया। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ रामलीला के आगामी आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।

229 वर्षों से चली आ रही है परंपरा
रामनगर की रामलीला को लगभग 229 वर्ष पुरानी परंपरा के रूप में जाना जाता है। इसकी विशिष्ट मंचन शैली और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के कारण इसे वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। रामचरितमानस के प्रसंगों को करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले लगभग 40 खुले लीला स्थलों पर प्रस्तुत किया जाता है।
करीब एक महीने तक चलने वाले इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। हर वर्ष लाखों लोग रामनगर की इस अनूठी रामलीला के साक्षी बनते हैं। सामान्य दिनों में भी देर शाम तक अलग-अलग लीला स्थलों पर हजारों दर्शकों की मौजूदगी रहती है, जबकि प्रमुख प्रसंगों के दौरान भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। अनंत चतुर्दशी से शुरू होने वाली रामलीला को लेकर अब रामनगर में तैयारियों के साथ धार्मिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।
