वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डालमिया छात्रावास में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मेस में परोसी गई नॉनवेज सब्जी में मृत छिपकली मिलने का मामला सामने आया। घटना के बाद छात्रावास में रहने वाले छात्रों में नाराजगी फैल गई और कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मेस और कैंटीन को अगले आदेश तक बंद करने का निर्णय लिया है। वहीं कुलपति ने पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर करीब 12 बजे छात्र मेस में भोजन कर रहे थे। इसी दौरान कुछ छात्रों की नजर नॉनवेज सब्जी में पड़ी छिपकली पर गई। उस समय तक लगभग 25 से 30 छात्र खाना खा चुके थे। खबर फैलते ही छात्र घबरा गए और मेस परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई। इस बीच कुछ छात्रों को उल्टी और बेचैनी की शिकायत होने लगी।
स्थिति बिगड़ती देख छात्रावास प्रशासन सक्रिय हुआ। वार्डेन प्रो. राघव मिश्रा ने तत्काल एंबुलेंस बुलवाई और छह छात्रों को उपचार के लिए सर सुंदरलाल अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने छात्रों की जांच कर उन्हें दवा दी तथा निगरानी में रखा। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल सभी छात्रों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
घटना के बाद छात्रों ने मेस संचालन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। छात्रों का कहना है कि मेस में लंबे समय से खाने की गुणवत्ता खराब है, लेकिन शिकायतों के बावजूद सुधार नहीं किया गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि शाकाहारी और मांसाहारी भोजन एक ही तेल में तैयार किया जाता है, जिससे स्वच्छता और धार्मिक भावनाओं दोनों पर असर पड़ता है। इसके अलावा बर्तनों की सफाई भी ठीक ढंग से नहीं होती।
छात्रों ने छात्रावास की अन्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि हॉस्टल के शौचालय समय पर साफ नहीं किए जाते और पीने के पानी की भी समस्या बनी रहती है। छात्रों ने वार्डेन को ज्ञापन सौंपकर मेस संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि वही संचालक कैंटीन भी चला रहा है, जिसके कारण व्यवस्थाएं पूरी तरह बिगड़ चुकी हैं।
वार्डेन प्रो. राघव मिश्रा ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी सभी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी की स्थिति में छात्र तुरंत छात्रावास प्रशासन से संपर्क करें। प्रशासन विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
उन्होंने यह भी बताया कि वाटर कूलर से संबंधित समस्या स्थायी नहीं है। उनके अनुसार नीचे रखा गया एक वाटर कूलर किसी छात्र द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, जिसके बाद उसे मेस परिसर के अंदर सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया। अन्य समस्याओं को भी जल्द दूर कराने का आश्वासन दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक संरक्षक और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में संबंधित मेस और कैंटीन को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक बंद करने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
घटना के बाद छात्रावास में रहने वाले छात्रों में रोष का माहौल है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
