बीएचयू का 14 सदस्यीय पर्वतारोहण दल फ्रेंडशिप पीक अभियान पर रवाना

बीएचयू का 14 सदस्यीय पर्वतारोहण दल फ्रेंडशिप पीक अभियान पर रवाना

वाराणसी (रणभेरी): साहसिक खेलों और पर्वतारोहण गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Banaras Hindu University के विश्वविद्यालय पर्वतारोहण केंद्र का 14 सदस्यीय छात्र-छात्राओं का दल हिमाचल प्रदेश में स्थित फ्रेंडशिप पीक के आरोहण अभियान के लिए शनिवार को रवाना हो गया। अभियान दल को विश्वविद्यालय के कुलपति Ajit Kumar Chaturvedi ने शुभकामनाओं के साथ हरी झंडी दिखाकर विदा किया।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह अभियान विद्यार्थियों में साहस, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और कठिन परिस्थितियों में कार्य करने की दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। अभियान के दौरान दल हिमालय की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हुए लगभग 5,289 मीटर (17,352 फीट) ऊंची फ्रेंडशिप पीक पर पहुंचने का प्रयास करेगा।

अनुभवी प्रशिक्षकों के नेतृत्व में होगा अभियान

विश्वविद्यालय पर्वतारोहण केंद्र के प्रभारी प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अभियान का संचालन प्रशिक्षक बलराम यादव और शिवनारायण यादव के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। दोनों प्रशिक्षकों को पर्वतीय अभियानों का व्यापक अनुभव है और उनकी देखरेख में विद्यार्थियों को आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है।

उन्होंने बताया कि फ्रेंडशिप पीक हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध Pir Panjal Range पर्वतमाला में स्थित है और पर्वतारोहियों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण लेकिन लोकप्रिय शिखर माना जाता है। अभियान के दौरान सुरक्षा और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

मनाली से शुरू होगी रोमांचक यात्रा

अभियान की शुरुआत Manali से होगी। दल निर्धारित मार्ग के अनुसार मनाली से आगे बढ़ते हुए सोलंग घाटी, धुंधी और बकरथाच जैसे पर्वतीय पड़ावों से होकर गुजरेगा। इसके बाद टीम व्यास कुंड पहुंचेगी, जिसे स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक परंपराओं में विशेष महत्व प्राप्त है।

व्यास कुंड समुद्र तल से लगभग 12,700 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है और इसे व्यास नदी के उद्गम क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। पर्वतारोहण दल का पहला शिविर इसी क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा, जहां सदस्य ऊंचाई के वातावरण के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करेंगे।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थापित होंगे शिविर

यात्रा के अगले चरण में दल लगभग 15,500 फीट की ऊंचाई वाले लेडी लेग क्षेत्र में दूसरा कैंप लगाएगा। इसके बाद लगभग 14,900 फीट की ऊंचाई पर एडवांस बेस कैंप स्थापित किया जाएगा।

एडवांस बेस कैंप में पर्वतारोहियों को बर्फीले क्षेत्रों में चलने, रस्सियों के उपयोग, ग्लेशियर पार करने तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया जाएगा। यहां स्नोक्राफ्ट और आइसक्राफ्ट संबंधी तकनीकों का गहन अभ्यास भी किया जाएगा ताकि अंतिम शिखर प्रयास के समय किसी प्रकार की कठिनाई न आए।

दस दिवसीय अभियान में महिला पर्वतारोही निभा रहीं अहम भूमिका

अभियान की डिप्टी लीडर कुमारी ने बताया कि लगभग दस दिनों तक चलने वाले इस अभियान का प्रमुख लक्ष्य फ्रेंडशिप पीक का सफल आरोहण है। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का माध्यम भी है।

उन्होंने युवाओं, विशेषकर छात्राओं को साहसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि परिवार और समाज का सहयोग मिलने पर लड़कियां भी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें इस चुनौतीपूर्ण अभियान का हिस्सा बनने का अवसर दिया।

सुरक्षा उपकरणों से लैस है पूरी टीम

अभियान दल के सदस्यों के अनुसार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक पर्वतारोहण उपकरण साथ ले जाए गए हैं। दल के पास विशेष रस्सियां, हार्नेस, हेलमेट, आइस एक्स, क्रैम्पॉन और अन्य तकनीकी उपकरण उपलब्ध हैं।

पर्वतारोहियों का मानना है कि पर्वतारोहण में रस्सी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा साधनों में से एक होती है, इसलिए अभियान के दौरान प्रत्येक गतिविधि निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप की जाएगी।

तीन महीने की कठिन तैयारी के बाद तैयार हुए छात्र

दल के सदस्य एवं भूगोल विभाग के स्नातकोत्तर छात्र शुभम कुमार उपाध्याय ने बताया कि अभियान के लिए पिछले तीन महीनों से लगातार प्रशिक्षण चल रहा था। इस दौरान विद्यार्थियों ने पर्वतारोहण की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में रैपलिंग, जुमारिंग, ट्रैकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चलने की तकनीकों को शामिल किया गया। विद्यार्थियों की शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित दौड़, लंबी दूरी की पदयात्राएं और सहनशक्ति बढ़ाने वाले विशेष अभ्यास कराए गए।

उन्होंने बताया कि कई प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों को लगभग 25 से 26 किलोग्राम भार के साथ लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ा, जिससे कठिन परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता विकसित हो सके।

मानसिक मजबूती पर भी दिया गया विशेष जोर

पर्वतारोहण केवल शारीरिक शक्ति का नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता का भी खेल माना जाता है। इसी कारण प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने का अभ्यास कराया गया।

प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को टीमवर्क, नेतृत्व, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान किया।

ऑक्सीजन की कमी से निपटने की विशेष तैयारी

शुभम कुमार उपाध्याय ने बताया कि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी पर्वतारोहियों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होती है। अधिक ऊंचाई पर कई बार “एक्यूट माउंटेन सिकनेस” जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रतिभागियों को विशेष शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया। नियमित दौड़, एंड्योरेंस ट्रेनिंग, लंबी पदयात्राओं और नियंत्रित अभ्यासों के माध्यम से शरीर को कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के अनुरूप तैयार किया गया।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा अभियान

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह अभियान विद्यार्थियों में साहसिक खेलों के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति, अनुशासन और टीम भावना का महत्व भी सिखाएगा। फ्रेंडशिप पीक अभियान में सफलता प्राप्त करने के बाद यह दल विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को भी पर्वतारोहण और साहसिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करेगा। इस अभियान को विश्वविद्यालय के साहसिक खेल कार्यक्रमों की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है और सभी की निगाहें अब दल के सफल शिखर आरोहण पर टिकी हुई हैं।

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