वाराणसी (रणभेरी): काशी में बाबा लाट भैरव के विवाह समारोह को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंचने लगा है। 26 सितंबर को होने वाले विवाह से पहले मंदिर परिसर में पारंपरिक वैवाहिक रस्में निभाई जा रही हैं। 23 सितंबर को तिलक समारोह के बाद गुरुवार रात बाबा लाट भैरव के दरबार में हल्दी की रस्म संपन्न हुई।
हल्दी उत्सव में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय महिलाएं पीले वस्त्र पहनकर पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान के साथ बाबा के विग्रह पर हल्दी अर्पित की। इसके बाद विवाह से जुड़े पारंपरिक लोकगीतों और मंगलगीतों का दौर शुरू हुआ। गीतों की धुन पर महिलाओं ने नृत्य कर उत्सव में भागीदारी की।
मनचाहे वर और अखंड सौभाग्य की कामना
श्री कपाल भैरव अथवा लाट भैरव प्रबंधक समिति के आयोजन में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल के अनुसार, बाबा को अर्पित की गई हल्दी बाद में प्रसाद के रूप में महिलाओं और युवतियों को वितरित की गई। हल्दी की रस्म के दौरान युवतियों ने बाबा से मनपसंद वर की कामना की, जबकि सुहागिन महिलाओं ने अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा।

कार्यक्रम की शुरुआत लोकगीत मंडली ने गणेश वंदना से की। इसके बाद विवाह से जुड़े पारंपरिक मंगलगीत प्रस्तुत किए गए। आयोजन स्थल पर महिलाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी से मंदिर परिसर का माहौल पूरी तरह विवाह समारोह जैसा हो गया।
ढोलक-मंजीरे की थाप पर देर रात तक गूंजे गीत
महिलाओं ने इस कार्यक्रम के दौरान हारमोनियम, ढोलक और मंजीरे की संगत के बीच कई पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए गए। साथ ही गीतों और नृत्य कर उत्सव की रौनक बढ़ाई। हल्दी समारोह में काशी की लोक परंपरा और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। महिलाओं ने विवाह की पुरानी रस्मों और लोकगीतों को निभाते हुए पारंपरिक संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
