अवसाद के आगोश में समा रही युवा पीढ़ी 

अवसाद के आगोश में समा रही युवा पीढ़ी 
  •  नकारात्मक सोच की तरफ ले जाता है हद से ज्यादा किसी से तुलना करना 

वाराणसी (रणभेरी सं.)। अपेक्षाओं और उपेक्षाओं से भरे जीवन में हर आयु वर्ग के लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। स्कूली बच्चे भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं। परिवार से झगड़ा हुआ हो, परीक्षा में नंबर कम आए हों या कोई पर्सनल रिलेशनशिप, व्?यक्ति को तनाव हो ही जाता है। ऐसे में कई लोग आगे बढ़कर समस्या से निपटने के तरीके खोजते हैं, लेकिन वहीं कुछ लोगों के मन में आत्महत्या का विचार आता है।  लोगों को इसी आत्महत्या रूपी दलदल से बाहर निकालने के लिए मगंलवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया गया। आत्महत्या कैसे रुकें इसके लिए शहर में अलग-अलग कार्यक्रमों में इस पर तमाम बातें हुईं। पर मंगलवार को आंध्रा आश्रम में सगे भाइयों की सुसाइड ने एक बार फिर सभी को झकझोर दिया। दोनों की उम्र 32 और 34 साल थी। सिर्फ यह एक केस ही नहीं बल्कि ऐसे न जाने कितने लोग सुसाइड करके अपनी जिंदगी को खत्म कर लेते हैं। सिर्फ मध्यम वर्ग के लोग ही नहीं बल्कि उच्च वर्ग के पढ़े-लिखे लोग भी सुसाइड कर रहे हैं। डॉक्टर का मानना है कि डिप्रेशन इसकी बड़ी वजह है। ऐसे कई मामले बीएचयू और महिला थाने में काउंसलिंग के लिए पहुंचते हैं। जो लोग समय रहते काउंसलिंग करा लेते हैं। उनकी जान बच जाती है।   

तनाव में विशिष्ठ वर्ग

मनोचिकित्सक ने बताया, विशिष्ठ वर्ग और पढ़े लिखे लोगों को भी आम लोगों की तरह ही निराशा घेरती है। वो अवसाद में आते हैैं और उन्हें भी तनाव परेशान करता है। जब वो ये सब झेल नहीं पाते तो जिंदगी खत्म करने का रास्ता चुनते हैं। आज के समय में देखा जाए तो पढ़े-लिखे लोग भी बेरोजगारी के चलते सुसाइड कर रहे हैं। कई बार संपन्न होने के बाद भी फैमिली सपोर्ट न होने या फिर अकेला महसूस होने पर ऐसा कदम उठाते हैं। हालांकि, उन्हें ये समझने की जरूरत है कि सुसाइड ही हल नहीं है। उनके पास रहने के अनेकों रास्ते हैं, पर डिप्रेशन में वो कुछ भी सोचने समझने की क्षमता को खो देते हैं। काउंसलिंग के लिए 90 परसेंट केस 18 से लेकर 35 साल तक की उम्र के युवाओं के आते हैं।

यूथ को ज्यादा डिप्रेशन: एडीसीपी

एडीसीपी ममता रानी ने बताया, आज के समय में युवाओं में डिप्रेशन की समस्या सबसे ज्यादा है, जिसके चलते वह गलत कदम भी उठा रहे हैं। लगातार काउंसलिंग करके लोगों की समस्या को हल किया जा रहा है। हर वर्ग के लोग सुसाइड का रास्ता अपना रहे हैं। जो संपन्न लोग हैं वह अकेलेपन का शिकार हैं। जो युवा हैं वह अपने करियर को लेकर चिंता में हैं। जो चिंता उन्हें अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। इसी के चलते लोग लगातार सुसाइड कर रहे हैं।

वरुणा जोन में सर्वाधिक सुसाइड

वाराणसी कमिश्नरेट के विभिन्न थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में 157 सुसाइड की घटनाएं हुई हैं। लोगों ने मौत को गले लगाया।  

एक संदेश 

देश का युवा देश की पूँजी है। उसे यूँ ही बर्बाद हो जाने और मरने के लिये नहीं छोड़ा जा सकता बल्कि उसे साथ लेकर चलने, उसकी भावनाओं के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है। उसे जीवन का मोल समझाने की जरूरत है, और यह बताने की जरूरत है कि उसके पास यदि स्वस्थ जीवन रहा तो वह भी अमूल्य रत्न है जिसके सहारे वह कोई भी उत्पादक गतिविधि करके अपने जीवन को सार्थक कर सकता है।