वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, बाढ़ की चपेट में आए सैकड़ों परिवार, लोगों ने दूसरे स्थान पर ली है शरण

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं। चेतावनी बिंदु पार करने के बाद अब गंगा खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है। गुरुवार को केंद्रीय जल आयोग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार सुबह 6 बजे गंगा का जलस्तर 70.91 मीटर दर्ज किया गया था। इसके बाद एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से पानी बढ़ा और सुबह 8 बजे तक यह 70.92 मीटर पर स्थिर हो गया। हालांकि दो घंटे बाद फिर वृद्धि शुरू हुई और दोपहर 2 बजे तक गंगा का जलस्तर 70.95 मीटर पहुंच गया। वर्तमान में गंगा का स्तर चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से 69 सेंटीमीटर ऊपर और खतरे के निशान 71.26 मीटर से 31 सेंटीमीटर नीचे बह रहा है।
गंगा में उफान के चलते शहर और आसपास के कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 16 मोहल्लों और 18 गांव के 843 परिवारों के 3526 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही 6507 किसानों की लगभग 1597 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खड़ी फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं। गंगा और वरुणा नदी के तटीय इलाकों में पानी घरों के भीतर घुस गया है। दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो चुका है, जबकि अस्सी से राजघाट तक तीन हजार से अधिक मंदिर पानी की चपेट में आ गए हैं।
प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने 46 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें से 17 शिविर सक्रिय हैं। इन शिविरों में अब तक 557 परिवारों के 2538 लोगों ने शरण ली है। वहीं 266 परिवारों के 998 लोग अपने रिश्तेदारों या सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। राहत और बचाव कार्य में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार सक्रिय हैं। 48 नावों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगाया गया है ताकि लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
हालात गंभीर होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नगवां नाले से पानी घुसने के बाद जगन्नाथ गली के रास्ते पर चार फीट पानी जमा हो गया है। इस कारण रामेश्वर मठ से भागवत महाविद्यालय होते हुए गली तक का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। रामेश्वर मठ में रहने वाले विद्यार्थियों को मजबूरन दूसरे तल पर शरण लेनी पड़ी। वहीं संगम पुरी कॉलोनी के कई परिवार भी बाढ़ की चपेट में आकर परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अभी तक नावों की व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई है, जिससे दिक्कतें और बढ़ रही हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन लगातार अलर्ट जारी कर रहा है। अधिकारियों ने अपील की है कि जिनके भी मकान पानी में डूब गए हैं, वे छतों पर न रुकें और तुरंत निकटतम राहत शिविर में चले जाएं। प्रशासन का कहना है कि सभी प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है, ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां पूरी सतर्कता से हालात पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन बाढ़ से प्रभावित लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।