संत के सीर में आस्था उमड़ा का सैलाब

संत के सीर में आस्था उमड़ा का सैलाब
  • संत रविदास की जयंती पर सीर में भक्तों की लंबी कतार
  • देश-विदेश से आये रैदासियों से गुलजार है गुरु की जन्मस्थली

वाराणसी (रणभेरी): संत रविदास मंदिर जयंती पर रविवार को सीर गोवर्धन स्थित संत शिरोमणी के दर पर सुबह से ही जयंती उत्सव का उल्लास घुला रहा। गुरु रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट चेयरमैन व डेरा सचखंड बल्ल जालंधर पीठाधीश्वर संत निरंजन दास ने मंदिर के सामने रविदासिया ध्वज फहराया और जयघोष के बीच गुलाब की पंखुड़ियां बरस पड़ीं। भजन-कीर्तन गूंजे और दर्शन-पूजन की कतार का आकार बढ़ता चला गया। इसके साथ सत्संग पंडाल में जुटान हुई और संत निरंजन दास समेत संत-महंत गुरु रविदास के व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रवचन करते रहे। जन्म स्थली के चार किलोमीटर दायरे में इस ओर से उस छोर तक श्रद्धा और आस्था का सागर सा लहरा रहा।

जयंती उत्सव का शुभारंभ शनिवार की शाम संत रविदास पार्क में दीप माला सजाकर किया गया था। रात भर पंडालों से गुरु की महिमा बखानते भजन व जयकारों से चहुंदिशाएं गूंजती रहीं। सुबह हर ओर से प्रभात फेरी की कतार जुड़ी और इसमें स्वर मिलाते संत रविदास पार्क की ओर बढ़ी।गुरु की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते रहे और मन के हर भाव उनके चरणों में धर दिया। श्रद्धा भक्ति और आस्था के इस मेले में दोपहर होते होते इतनी भीड़ उमड़ पड़ी कि सीर गोवर्धन की सड़कें अंड़स सी गई। दूसरी ओर सेवा का पुण्य बटोरने का बेजोड़ भाव भी दिखा। पांच हजार से अधिक तो तय सेवादार लेकिन तमाम ऐसे भी हैं जो अघोषित रूप से सफाई, सुरक्षा, रसोई व लंगर की कमान संभाले हुए थे। डेरा सच खंड बल्‍ला जालंधर के पीठाधीश्‍वर संत निरंजन दास ने सीर गोवर्धन में संत रविदास जयंती पर गुरु की महिमा का बखान किया तो दिन भर भजन कीर्तन कर गुरु को भक्‍तों ने नमन किया। सुबह से ही मंदिर परिसर में लंगर का दौर चला तो आस्‍थावानों को प्रसाद भी मंदिर परिसर में वितरित किया जा रहा। वहीं सुबह से ही मंदिर में दर्शन पूजन के लिए वीआइपी और वीवीआइपी के आगमन का दौर चला।

कई राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु

कहीं अटूट लंगर की पांत लगी रही तो कहीं भजनों की टोलियों के झांझ, मजीरे बजते रहे। लाल, नीली, पीली पगड़ी में पंजाब भी था और अपनी पारंपरिक वेशभूषा में राजस्थानी झलक भी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से लेकर कर्नाटक, महाराष्ट्र, जम्मू, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार की संस्कृतियों का मिलन शिविरों में एक साथ हो रहा था। सड़कों की पटरियों पर खिलौने भी सजाए गए और खेतों में झूले, चर्खियों पर बच्चों, युवाओं की मस्ती भी देखते बन रही थी।

लघु भारत से दिखा नजारा

डेरा सच्चखंड बल्लां, जालंधर के गद्दीनशीन संत निरजंन दास ने पूरे मेला क्षेत्र का निरीक्षण करके तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान दोनों तरफ श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए कतारबद्ध खड़े थे। संत की जन्मस्थली पर लघु भारत जैसा नजारा दिखा।

रविदासिया धर्म का ध्वजारोहण किया

संत रविदास जन्मस्थली सीरगोवर्द्धन पुर में जयंती के दिन धर्म प्रमुख संत निरंजन दास ने प्रतिनिधि के रुप में संत मनदीप दास को भेजकर सुबह सात बजे नगवां स्थित रविदास पार्क में संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कराए। इसके बाद मंदिर में रविदासिया धर्म के 120 फीट ऊंचा हरि निशान का ध्वज को भक्तों के साथ भजन कीर्तन करते हुए ध्वजारोहण किया। भक्त रविदास शक्ति अमर रहे के जयकारे के साथ जमकर झूमते और नाचते हुए अपने गुरु की जय जय कार करते रहे। यह दृश्य देखने लायक होता था।