गौरैयों के संरक्षण के लिए सभी को लेना होगा संकल्प

वाराणसी (रणभेरी सं.)। आर्य महिला पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग द्वारा प्राचार्या रचना दुबे के संरक्षकत्व में गुरुवार को महाविद्यालय में 'विश्व गौरैया दिवस' मनाया गया। संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्रो. जया मिश्रा ने गौरैया से जुड़े अपने स्वानुभव को व्यक्त करते हुए गौरैया दिवस के महत्त्व एवं उसके संरक्षण के विविध उपायों पर चर्चा की। कहा कि विश्व गौरैया दिवस मनाने का उद्देश्य गौरैया पक्षी की लुप्त होती प्रजाति को बचाना है। पेड़ों की अंधाधुंध होती कटाई, आधुनिक शहरीकरण और लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से गौरैया विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। हम सभी को गौरैया संरक्षण के लिए संकल्प लेने की आवश्यकता है। डॉ. पुष्पा त्रिपाठी ने अपने घर पर किए गए गौरैया संरक्षण के प्रयासों को बताते हुए अपने घर में रहने वाले गौरैया परिवार के साथ अपने अंत:सम्बन्ध को बताया। डॉ. दिव्या ने गौरैया से होने वाले लाभ के बारे में बताते हुए उनके संरक्षण के उपायों पर प्रकाश डाला। डॉ. नागमणि त्रिपाठी, डॉ. ऋतु कयाल, डॉ. अरिमा त्रिपाठी, डॉ. विनीता सिंह तथा राजकुमार कयाल आदि सभी प्राध्यापकों ने इस कार्यक्रम में स्वानुभव कथन के साथ-साथ गौरैया संरक्षण के लिए किए गए अपने-अपने प्रयासों की जानकारी दी। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की स्नातक एवं स्नातकोत्तर की लगभग 30 छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
दी मालवीय हेल्पिंग हैंडस सोसाइटी द्वारा हर घर घोसला पहल की शुरूआत
वाराणसी (रणभेरी सं.)। दी मालवीय हेल्पिंग हैंडस सोसाइटी द्वारा "हर घर घोसला" पहल की शुरूआत की गई। बताया कि एनजीओ द्वारा लोगों को पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित घोसले प्रदान किए जाते हैं, जिन्हें घरों, बगीचों या सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है। गौरैया के घोसले बांटना एक बेहतरीन पहल है, जो इस पक्षी के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। गौरैया की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है, और यह पर्यावरणीय असंतुलन का एक संकेत है। घोसला बांटने का उद्देश्य गौरैया को सुरक्षित और उपयुक्त जगह प्रदान करना है, ताकि वे आराम से अपने अंडे दे सकें और संतान उत्पन्न कर सकें। गौरैया हमारे समाज और संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा रही है। यह घोसला देना गौरैया को एक सम्मान देने जैसा होता है और यह हमारे पारंपरिक संबंधों को प्रकृति के साथ पुन: स्थापित करने में मदद करता है। इस तरह की पहलें न केवल गौरैया के संरक्षण में मदद करती हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और समाज मे पर्यावरण जागरुकता बढ़ाने के लिये भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
गौरैया को मानें परिवार का ही सदस्य
वाराणसी (रणभेरी सं.)। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर गुरुवार को वन विभाग की ओर से मिनी जू में गौरैया संरक्षण जागरूकता संगोष्ठी की गई। वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार ने कहा कि गौरैया पारिस्थितिकी तंत्र की हिस्सा ही नहीं वह सांस्कृतिक प्रतीक भी है। इसलिए उसे अपने परिवार का हिस्सा बनाकर संरक्षित करना चाहिए। मुख्य वक्ता डॉ. गौतम चटर्जी ने कहा कि गौरैया की संख्या में कमी आई है। गौरैया से पर्यावरण सुरक्षित रहता है। वन विभाग से सेवानिवृत जेपी सिंह ने कहा कि वर्ष 2010 से गौरैया संरक्षण अभियान चलाकर गौरैया को बचाया जा रहा है। स्वागत प्रभागीय वनाधिकारी स्वाति श्रीवास्तव ने किया। संचालन ऐश्वर्या मिश्रा, धन्यवाद ज्ञापन उप प्रभागीय वनाधिकारी राकेश कुमार ने किया। कार्यक्रम के दौरान वन विभाग यंग इंडियन्स और वेस इंडिया फाउंडेशन की ओर से 100 परिवारों को घोंसले भेंट किये गये। इस दौरान यंग इंडियंस वाराणसी के अध्यक्ष धवल प्रकाश, सीए जमुना शुक्ल, राजेश श्रीवास्तव मौजूद रहे।
अजय राय के घर में गौरैया के लिए लगा घोसला
वाराणसी (रणभेरी सं.)। विश्व गौरैया दिवस पर गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के परिवार ने अपने घर को इन नन्हें साथियों के लिए और अधिक स्वागतयोग्य बनाने का एक प्रेरणादायक कदम उठाया। इस पहल के तहत अजय राय की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी रीना राय और उनके बच्चों श्रद्धा राय, शांतनु राय व आस्था राय ने घर में कई स्थानों पर घोंसले लगाए और गौरैया के लिए भोजन तथा पानी की व्यवस्था की। यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण योगदान है। इस दौरान अजय राय ने कहा कि गौरैया हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का एक अहम हिस्सा हैं और हम सभी को मिलकर उनके संरक्षण के लिए काम करना चाहिए। आज के इस दिन हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने घरों और आस-पास के क्षेत्रों में गौरैया के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल बनाएंगे।
अनुपयोगी सामग्री से बनाया गौरैया का घोसला
वाराणसी (रणभेरी सं.)। पिछले पांच वर्षों से गौरैया संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने की मुहिम में जुटे पिंडरा ब्लॉक के कंपोजिट स्कूल रमईपट्टी के शिक्षक व बच्चों ने गुरुवार को गौरैया के लिए मानवीकृत घोसला बनाया। स्टेट अवॉर्डी शिक्षक कमलेश कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में विश्व गौरैया संरक्षण दिवस पर विद्यालय के बच्चों ने अनुपयोगी सामग्री का प्रयोग करते हुए गौरैया के लिए न सिर्फ घोंसला बनाया अपितु सुंदर संदेश, स्लोगन, क्विज एवं चित्रकला के माध्यम से गौरैया संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाया। विद्यालय के बाल संसद की प्रधानमंत्री काजल एवं उप प्रधानमंत्री शालू ने गौरैया की दुर्दशा के लिए पेड़ों की कटाई, प्रदूषण, कीटनाशकों का प्रयोग, बढ़ते टावरों की संख्या एवं पतंग के मांझे को बताया। साथ ही कहा कि अधिक से अधिक पौधारोपण, प्रदूषण को कम करने, चिड़ियों के लिए घोंसला एवं दाना पानी रखकर हम पुन: गौरैया को अपने जैव पिरामिड का हिस्सा बना सकते हैं।