दलालों का साथ धनबलियों का विकास

- तो क्या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी जाति-धर्म देखकर की जा रही है ?
- सोने की चमक के आगे कमजोर पड़ गया एचएफएल का दायरा
वाराणसी (रणभेरी/विशेष संवाददाता)। सबका साथ, सबका विकास.... जब यह नारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया था तो लोगों को यह विश्वास हो गया था कि इस सरकार में जरूर हर वर्ग के लोगों का विकास होगा। समय के साथ साथ यह नारा जब जमीनी स्तर पर आया तो पूरे दांव ही उल्टे निकले। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ही एक ऐसा भ्रष्ट विभाग है जिसने प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास वाले नारे को न सिर्फ झूठा बनाया बल्कि इसी नारे को अपने अंदाज में परिभाषित कर शहर में भ्रष्टाचार की एक नई इबारत लिख डाली। हम बात कर रहे है प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सबसे भ्रष्ट और निकम्मे विभाग वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) की। वीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास वाले नारे को इस तरह रेखांकित किया कि काशी जैसे धार्मिक शहर की सुंदरता को मिट्टी में मिला दिया। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर में तमाम अवैध कॉलोनियां बस गई, कई अवैध निर्माण हो गए। शहर का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां अवैध निर्माण की गंगा न बहती हो। यह सारा खेल वीडीए अधिकारियों के नाक के नीचे होता है। दरअसल इस खेल के पीछे बहुत बड़ा राज है। वीडीए के अधिकारी धन्नासेठों के आगे अपना ईमान बेच देते हैं और फिर नतमस्तक हो जाते हैं। उन्हें न मुख्यमंत्री के आदेशों का फिक्र या डर है न ही हाइकोर्ट के आदेशों की कोई परवाह। जिसका आलम यह है कि पैसा लाओ अवैध निर्माण कराओ। जहां एक ओर गरीबों के निर्माण पर भ्रष्ट वीडीए का बुलडोजर तुरंत चल पड़ता है वहीँ धनबलियों के अवैध निर्माण पर वीडीए का बुलडोजर कुंठ हो जाता है। दबी जुबान यह चर्चा अक्सर बनी रहती की वीडीए के अधिकारी बुलडोजर की कार्रवाई जाति- धर्म देखकर करते है। हैरानी की बात यह है कि दलालों के जरिये धन्नासेठों से साठ-गांठ कर वीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों ने शहर में अवैध निर्माण की बाढ़ ला दी है। ऐसा लगता है मानो वीडीए के अधिकारीयों ने प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास वाले नारे को दलालों का साथ, धन बलियों का विकास समझ लिया हो।
नतमस्तक है वीडीए के अधिकारी
असल में वीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों ने धर्म नगरी काशी में अधार्मिक कृत्यों का खुलेआम ठेका ले रखा है। वाराणसी में धनबलियों और रसूखदारों के आगे वीडीए के अधिकारी अपना जमीर और ईमान पूरी तरह से गिरवी रख चुके है। एक तरफ शहर में अवैध निमार्णों के खिलाफ अभियान दिखाकर विभाग अपने ही कुकर्मों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है वहीं दूसरी तरफ आज भी शहर के सभी जोन अंतर्गत सैकड़ों ऐसे व्यवसायिक अवैध निर्माण का कार्य प्रगति की ओर है जिन्हें सम्बंधित जोनल अधिकारियों का पूरा संरक्षण प्राप्त है। शहर में एक भी ऐसा अवैध निर्माण नहीं जिसकी भनक वीडीए को ना हो। वीडीए के कर्मचारी सुबह से शाम तक मोहल्लावार शहर के अगल अलग क्षेत्रों में रेकी कर यही पता करते रहते हैं कि कहां-कहां अवैध निर्माण शुरू हुआ है। सूत्रों की माने तो वाराणसी में विकास प्राधिकरण के सभी जोनल अफसरों ने अवर अभियंताओं के जरिये अब क्षेत्रवार आउटसाइडरों की भी तैनाती कर दी है जिन्हें बाकायदा अवैध निमार्णों की सूचना, मीटिंग, सीलिंग और डीलिंग के लिए वसूली की रकम में से कमीशन भी दिया जाता है। यहीं वजह है की किसी भी व्यक्ति के मकान के पास अगर बालू, गिट्टी या कोई भी भवन निर्माण सामाग्री गिर जाए तो उसकी सूचना भी वीडीए अधिकारियों तक तुरंत पहुंच जाती है। लेकिन यह शर्मनाक है कि सबकुछ जानते हुए भी वाराणसी विकास प्राधिकरण अंधा बना हुआ है। असल में अवैध निमार्णों से अंजान बनने के पीछे का खेल कुछ और ही है और यहीं से शुरू हो जाता है विभाग के अवैध वसूली का दौर।
दशाश्वमेध और भेलूपुर जोन में सर्वाधिक अवैध निर्माण
शहर के दशाश्वमेध और भेलूपुर जोन में वीडीए अधिकारियों की मिलीभगत से सबसे अधिक निर्माण हुएं है। दशाश्वमेध वार्ड के मंडुआडीह, मुढ़ेला, मडौली, चुरामनपुर, लहरतारा, नाथूपुर, बीएलडब्लू आदि क्षेत्रों में धड़ल्ले से जो अवैध निर्माण हो रहा था वह लगभग वीडीए के अधिकारियों की कृपा से बनकर तैयार है। यह सारे अवैध निर्माण वीडीए जोनल की पूर्ण सहमति और बताए उपाय के दम पर ही हुआ है। वीडीए के अफसर बाकायदा अवैध निर्माणकर्ता को अवैध रूप से निर्माण पूरा करने का उपाय बताए थे।
सील- डील का खेल में सीएम की आंख में झोंकते धूल
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के भ्रष्टतम विभाग वाराणसी विकास प्राधिकरण के लोभी अधिकारियों के निजी स्वार्थ की बदौलत शहर में अवैध निमार्णों की बाढ़ आ गयी है। शहर का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां अवैध मकान न बने हो। ये भ्रष्ट अधिकारी सील और डील का खेल खेलकर सीएम योगी आदित्यनाथ के आंख में भी निरंंतर धूल झोंकते हैं। ये लोभी अधिकारी चंद रुपए की लालच में अपना ईमान धन्नासेठों और रसूखदारों के चरणों में गिरवी रख देते हैं। अवैध निर्माण में सबसे बड़ा हाथ वीडीए के जोनल अधिकारी और जेई का होता है। वीडीए के उच्चाधिकारी इतने घाघ प्रवृत्ति के हैं कि अवैध निर्माण की भनक लगते ही इनके शागिर्द दलालों के जरिये सक्रिय हो जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि शहर के चप्पे-चप्पे पर होने वाले अवैध निर्माण का पता लगाने के लिए बाकायदा विभाग के बड़े अफसरों ने अपना-अपना आउटसाइडर सेट कर रखा है, जो घूम-घूम कर अवैध निर्माण की रेकी करते है और फिर ऐसे अवैध निर्माण की सूचना वीडीए के बड़े अधिकारी तक पहुंचाते हैं। जिसके बाद विभागीय अधिकारी बकायदा लाव-लश्कर के साथ अवैध निर्माण तक पहुंचते है। यहीं से डील डॉल देने के बाद शुरू होता है वीडीए अफसरों का असली खेल। ये अवैध निर्माण को इसलिए सील नहीं करते है कि वास्तव में निर्माण अवैध हैं बल्कि सील के पीछे इनका मकसद भारी भरकम डील का होता है।
नियमों का हवाला देकर अवैध निर्माणों को देते हैं शह
शहर में होने वाले अवैध निर्माणों को विकास प्राधिकरण के अधिकारी शह देते हैं। सील की कार्रवाई के बाद नक्शा दाखिल करने पर ही उसे खोल दिया जाता है। कई मामलों में तो सील के बाद निर्माण पूरा हो गया और शमन मानचित्र दाखिल किया गया। हकीकत यह है कि अवैध निर्माण करने वालों में वीडीए का कोई खौफ नहीं है।
एचएफएल क्षेत्र में भी होता है अवैध निर्माण
हाइकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है कि गंगा के 200 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होगा। अगर होता है तो उसे अवैध करारकर ध्वस्त किया जाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के वीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों की मेहरबानी से एचएफएल क्षेत्र में भी जमकर अवैध निर्माण हुआ। आज भी एचएफएल क्षेत्र में अवैध निर्माण जारी है। धन्नासेठों ने वीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों के ईमान को खरीदकर हाई कोर्ट के आदेशों को भी ताख पर रख दिया है। सैकड़ों अवैध निर्माण एचएफएल क्षेत्र में हो गए और वीडीए के अधिकारी आंख बंद कर इसीलिए सोते रहे की दलालों और धनबलियों ने वीडीए के भ्रष्ट अधिकारियों इनके आगे अपना जमीर गिरवी रख दिया।
सीएम के खासमखास को भी नहीं है भनक !
वीडीए के बोर्ड मेंबर में वीसी सहित कुल 13 सदस्य है जिसमें 10 प्रशासनिक अधिकारी और 3 सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि शामिल है। इन तीनों में एक नाम अम्बरीष सिंह भोला का है। अम्बरीष सिंह भोला सीएम योगी आदित्यनाथ के खासमखास माने जाते हैं। लेकिन यह विडंबना है कि जिस वीडीए बोर्ड का सदस्य मुख्यमंत्री के करीबी को बनाया गया है उनको भी शायद यह नहीं मालूम की वीडीए के अधिकारी किस कदर शहर में अवैध निर्माण को सह देकर भ्रष्टाचार की इबारत लिख रहे हैं। यह प्रश्न संदेह पैदा करता है की वीडीए बोर्ड के मेंबर को इस बात की भनक नहीं होगी कि शहर में वीडीए के भ्रष्ट अधिकारी किस कदर भ्रष्टाचार की कहानी गढ़कर सीएम के छवि को ही नहीं बल्कि शहर की सुंदरता को भी धूमिल कर रहे है।
धनाढ्य व्यक्ति ने एचएफएल क्षेत्र में खड़ी कर दी आलीशान इमारत
वीडीए अधिकारियों के कारनामों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस प्रतिबंधित क्षेत्र में एक तल का निर्माण भी अवैध है उस प्रतिबंधित एचएफएल क्षेत्र में एक धनाढ्य व्यक्ति ने तीन मंजिला आलीशान इमारत को खड़ा कर दिया। भेलूपुर जोन के रविंद्रपुरी क्षेत्र में एक धनाढ्य व्यक्ति ने बिल्डिंग तानकर एक ज्वेलरी का शो रूम तक खोल दिया, लेकिन वीडीए के अधिकारियों की नजर यहां तक नहीं पहुंची। ऐसा नहीं है कि यह आलिशान इमारत एक - दो दिन या एक दो- महीने में तैयार हो गई। इमारत देख कर यह कोई दोराय नहीं कि इसे बनने में करीब दो साल से कम का समय नहीं लगा होगा। सवाल ये है इस दौरान वीडीए के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए थे या फिर धन्नासेठों के आगे अपना ईमान बेच दिया ! आखिर इतने दिनों तक जब यह निर्माण हुआ तो इसे रोक क्यों नहीं किया गया ! सूत्रों की माने तो पहले तल पर संचालित ज्वेलर्स की दुकान के ऊपरी तल पर होटल खोलने की भी योजना बनाई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि इस इमारत का निर्माण स्वयं वीडीए वीसी के संरक्षण में हुआ है इसलिए किसी अन्य क्षेत्रिय अधिकारी ने इस इमारत को छूने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाई।