(रणभेरी): देश में ई-फार्मेसी (ऑनलाइन दवा बिक्री) के बढ़ते प्रभाव और बड़े कॉर्पोरेट प्लेटफॉर्म्स की प्रतिस्पर्धा के खिलाफ बुधवार को केमिस्ट संगठनों ने व्यापक विरोध दर्ज कराया। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर देशभर में लगभग 15 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर एक दिन की हड़ताल पर रहे, जिससे कई राज्यों में दवा आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई।
हड़ताल का असर कई जगहों पर साफ दिखाई दिया, हालांकि अस्पतालों के भीतर संचालित मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहे। संगठन ने पहले ही स्पष्ट किया था कि आपातकालीन सेवाओं और अस्पताल आधारित दवा वितरण पर कोई रोक नहीं होगी, ताकि मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
फिर भी विभिन्न शहरों से दवा उपलब्ध न होने की शिकायतें सामने आईं। पटना स्थित IGIMS अस्पताल के बाहर कई मरीजों के परिजन आवश्यक दवाओं के लिए परेशान नजर आए, वहीं चंडीगढ़ के PGI में इलाज के लिए आए कुछ मरीजों को भी दवाइयों की अनुपलब्धता के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ई-फार्मेसी के खिलाफ प्रमुख आपत्तियां
केमिस्ट संगठनों का कहना है कि बिना पर्याप्त नियमन के चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री छोटे व्यापारियों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। उनका आरोप है कि भारी छूट और आक्रामक ऑनलाइन मार्केटिंग के चलते स्थानीय मेडिकल स्टोरों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है।
संगठनों ने सरकार के दो नियमों GSR 220(E) और GSR 817(E) पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इन नियमों में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म मनमाने ढंग से संचालन कर रहे हैं। इन नियमों की समीक्षा या उन्हें वापस लेने की मांग की जा रही है।
इसके अलावा यह भी चिंता जताई गई है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गलत या फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाएं खरीदी जा सकती हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। संगठन चाहता है कि ई-फार्मेसी के लिए सख्त और स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
दवा विक्रेताओं का यह भी कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दी जा रही 20 से 50 प्रतिशत तक की छूट के सामने छोटे दुकानदार टिक नहीं पा रहे हैं, जिससे पारंपरिक मेडिकल कारोबार संकट में है।
कोविड काल में मिली थी छूट
कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने ई-फार्मेसी सेवाओं को आवश्यक सेवा की श्रेणी में रखते हुए कई तरह की रियायतें दी थीं। लॉकडाउन के दौरान लोगों तक दवाइयों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवा बिक्री और घर तक डिलीवरी की अनुमति दी गई थी।
उस समय मरीजों की सुविधा को देखते हुए दवाओं की होम डिलीवरी और ऑनलाइन ऑर्डरिंग सिस्टम को बढ़ावा दिया गया, जिससे भीड़भाड़ से बचाव हो सके और इलाज में बाधा न आए।
अलग-अलग राज्यों में हड़ताल का प्रभाव
बिहार: राज्य में बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर हड़ताल में शामिल रहे। अनुमान है कि 40 हजार से अधिक दुकानें बंद रहीं। पटना समेत कई शहरों में मरीजों के परिजनों को दवाइयों के लिए भटकना पड़ा।
मध्य प्रदेश: भोपाल सहित राज्य के प्रमुख शहरों में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। केवल अस्पताल परिसरों के भीतर स्थित मेडिकल स्टोरों को ही काम करने की अनुमति रही।
छत्तीसगढ़: राज्य में हजारों मेडिकल स्टोर बंद रहे। रायपुर, बस्तर और जगदलपुर जैसे क्षेत्रों में दवा दुकानों के बंद रहने से आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, हालांकि कुछ स्थानों पर आपातकालीन सहायता के लिए संपर्क नंबर भी जारी किए गए।
पंजाब और चंडीगढ़: यहां 24 घंटे की हड़ताल के चलते अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे। चंडीगढ़ स्थित PGI जैसे बड़े अस्पतालों में आए मरीजों को भी दवाओं की कमी से जूझना पड़ा।
