बीएचयू में एमए इतिहास प्रश्न पर विवाद, छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन

बीएचयू में एमए इतिहास प्रश्न पर विवाद, छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन

(रणभेरी): वाराणसी स्थित Banaras Hindu University में एमए (इतिहास) चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विवाद तेज हो गया है। मामला “वुमेन इन मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री” पेपर में शामिल एक प्रश्न से जुड़ा है, जिसके बाद परिसर में छात्र राजनीति सक्रिय हो गई और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

बुधवार को विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के बाहर बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए। प्रदर्शन का नेतृत्व Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad से जुड़े छात्र कार्यकर्ताओं ने किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर-पोस्टर के साथ नारेबाजी करते हुए परीक्षा प्रश्न की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।

बीएचयू में एमए इतिहास प्रश्न पर विवाद, छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन

छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे उच्च शैक्षणिक संस्थान में प्रश्नपत्रों को पूरी तरह निष्पक्ष और संतुलित होना चाहिए। उनका आरोप है कि संबंधित प्रश्न एक विशेष वैचारिक दृष्टिकोण से प्रभावित प्रतीत होता है, जिससे छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और भविष्य में प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।

विवादित प्रश्न में महिलाओं की प्रगति पर “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” के प्रभाव को लेकर विश्लेषण करने को कहा गया था। इस प्रश्न को लेकर कुछ छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बताते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन का कहना है कि यह विषय निर्धारित सिलेबस में शामिल अकादमिक अवधारणा पर आधारित था और इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की विश्लेषण क्षमता को परखना था।

विश्वविद्यालय की ओर से यह भी कहा गया कि इतिहास जैसे विषयों में विभिन्न दृष्टिकोणों को समझना और उनका विश्लेषण करना अध्ययन का अहम हिस्सा है। इसी उद्देश्य से पाठ्यक्रम में विविध लेखकों और विचारकों की रचनाएँ शामिल की जाती हैं।

इस संदर्भ में पूर्व विभागीय अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि नारीवादी इतिहासकारों की कृतियों में सामाजिक संरचनाओं और ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण विभिन्न अवधारणाओं के माध्यम से किया गया है। उनका तर्क है कि अकादमिक अध्ययन का उद्देश्य किसी समूह को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों और संरचनाओं को समझना होता है।

बीएचयू में एमए इतिहास प्रश्न पर विवाद, छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन

इधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल मामले पर विस्तृत टिप्पणी से परहेज किया है, जबकि छात्र संगठनों का आंदोलन जारी रहने की बात कही जा रही है।

विवाद के बीच परिसर में शैक्षणिक निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर बहस भी तेज हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों ने स्पष्ट दिशानिर्देश और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसे विवाद दोबारा न हों।

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