(रणभेरी): केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ के औपचारिक दर्जे और उसके सार्वजनिक उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को अब सरकारी आयोजनों और औपचारिक कार्यक्रमों में सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने की व्यवस्था की जाएगी।
सरकारी प्रावधानों के अनुसार, प्रमुख राजकीय समारोहों जैसे ध्वजारोहण, राष्ट्रपति और राज्यपालों के कार्यक्रमों तथा अन्य औपचारिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण प्रस्तुत किया जा सकेगा। इसके साथ ही, यदि किसी आयोजन में ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ दोनों शामिल हों, तो पहले राष्ट्रीय गीत और उसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत करने का क्रम निर्धारित किया गया है।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों प्रस्तुतियों के दौरान उपस्थित लोगों से सम्मान स्वरूप खड़े रहने की अपेक्षा की जाएगी। हालांकि, सिनेमा हॉल और फिल्म प्रदर्शन जैसे मनोरंजन स्थलों में यह बाध्यता लागू नहीं होगी, ताकि दर्शकों के अनुभव पर असर न पड़े।
गृह मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के गायन को प्रोत्साहित करने की भी सलाह दी है। इसके तहत स्कूल-कॉलेजों में समय-समय पर इसके सामूहिक गायन को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ाना है। वहीं, इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि ‘वंदे मातरम’ को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं सदी में रचा था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह एक प्रेरणादायक नारा बन गया था।
