वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी शहर के कैंट थाना क्षेत्र में लंबे समय से संचालित बताए जा रहे अवैध जुए के अड्डे पर आखिरकार पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक लगातार शिकायतें पहुंचने और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि बड़े दांव लगाने वाले कुछ अन्य लोग पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार होने में सफल रहे।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने लगभग 21 हजार रुपये नकद, तीन नोट गिनने की मशीनें तथा ताश की नई गड्डियां बरामद कीं। बरामद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि यहां छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर जुआ खेला जाता था।
स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि संबंधित स्थान पर काफी समय से अवैध जुआ संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी पाया गया कि क्षेत्रीय पुलिस अधिकारियों ने मामले की जानकारी समय रहते उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंचाई।
इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से नदेसर चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक सुमित पाण्डेय, हल्का प्रभारी उपनिरीक्षक लल्लन यादव तथा मुख्य आरक्षी शनि विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया। तीनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
मिंट हाउस क्षेत्र में हुई छापेमारी
जानकारी के अनुसार कैंट क्षेत्र के मिंट हाउस तिराहे के आसपास बड़े पैमाने पर जुआ संचालित होने की सूचना पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंची थी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
निर्देश मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दबिश दी। पुलिस को देखते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। कई लोग मौके से भाग निकले, जबकि चार आरोपियों को पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान नकदी के अलावा नोट गिनने वाली मशीनें और ताश की गड्डियां बरामद हुईं।
गिरफ्तार आरोपियों को भेजा गया जेल
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि वहां लंबे समय से जुए का संचालन किया जा रहा था। इसके बाद सभी आरोपियों के खिलाफ सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
जांच रिपोर्ट में सामने आई गंभीर लापरवाही
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कराई गई जांच में पाया गया कि स्थानीय स्तर पर लगातार शिकायतें मिलने के बावजूद न तो जुए के अड्डे को बंद कराया गया और न ही कोई कानूनी कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित पुलिस अधिकारियों ने अवैध गतिविधियों की सूचना उच्चाधिकारियों को भी नहीं दी, जिससे उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
जांच में यह निष्कर्ष निकला कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में संबंधित पुलिसकर्मियों ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया।
थाना प्रभारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
पुलिस कमिश्नर ने केवल निलंबन तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। कैंट थाना प्रभारी की भूमिका की भी अलग से जांच कराई जा रही है। विभागीय अधिकारियों को यह पता लगाने का जिम्मा दिया गया है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी और नियंत्रण में कहीं और भी लापरवाही तो नहीं बरती गई।
यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता अथवा लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विभागीय नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मिलीभगत के आरोपों की भी जांच
जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं जिनसे संकेत मिलता है कि अवैध जुए के संचालन में स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिलने की आशंका है। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए विभागीय जांच का दायरा बढ़ाया गया है ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल की जा सके और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
जीरो टॉलरेंस की दोहराई गई नीति
मामले के बाद पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि कमिश्नरेट क्षेत्र में जुआ, सट्टा, संगठित अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, उदासीनता अथवा अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध गतिविधियों को लेकर पहले भी कई बार सख्त कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया। ऐसे में इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि विभागीय जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है और दोषियों के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
