वाराणसी (रणभेरी): आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (CIHTS) परिसर में बुधवार को धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस धार्मिक आस्था, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), नई दिल्ली तथा केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं, विद्वानों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश को स्मरण किया।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य रहे। उनके साथ कई बौद्ध धर्मगुरु, शिक्षाविद, संस्थान के अधिकारी और गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना और मंगलाचरण के साथ हुई, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिनपोछे ने स्वागत भाषण देते हुए धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके बाद केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर भगवान बुद्ध के जीवन, उनके ज्ञान प्राप्ति के बाद दिए गए प्रथम उपदेश तथा करुणा, अहिंसा और मानवता के संदेश को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को बुद्ध के जीवन दर्शन से जोड़ने का कार्य किया।

भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक : केशव मौर्य
अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध का मध्यम मार्ग केवल भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए शांति, सद्भाव और मानव कल्याण का मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया विभिन्न चुनौतियों और संघर्षों का सामना कर रही है, ऐसे समय में बुद्ध के विचार मानवता को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार बौद्ध धर्म से जुड़े सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। बौद्ध सर्किट के अंतर्गत सड़क, रेल और हवाई संपर्क में उल्लेखनीय सुधार किए गए हैं, जिससे भारत सहित दुनिया के अनेक देशों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
विश्व धरोहर की मान्यता से बढ़ेगी सारनाथ की पहचान
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलता है तो इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और अधिक मजबूत होगी। इससे विदेशी पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय पर्यटन उद्योग, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सारनाथ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश से प्रेरणा प्राप्त करता है।
“भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिया”
अपने संबोधन में केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस प्रसिद्ध कथन का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिया है।” उन्होंने कहा कि यह वाक्य भारत की सांस्कृतिक विरासत, सहिष्णुता और विश्व शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भगवान बुद्ध का संदेश आज भी विश्व को प्रेम, भाईचारे और अहिंसा का मार्ग दिखा रहा है।
पाली भाषा और बौद्ध धरोहर के संरक्षण पर सरकार का जोर
डिप्टी सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार ने पाली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देकर बौद्ध साहित्य, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे आने वाली पीढ़ियों को बौद्ध ग्रंथों और दर्शन को समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने सिद्धार्थनगर के पिपरहवा से प्राप्त भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन अवशेषों को विभिन्न देशों में प्रदर्शित किया गया, जहां लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट की। इससे भारत की बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।
धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
बौद्ध परंपरा के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के सात सप्ताह बाद सारनाथ के मृगदाय वन में अपने पांच पूर्व साथियों को पहला उपदेश दिया था। इस उपदेश को पाली भाषा में धम्मचक्कप्पवत्तन सुत्त तथा संस्कृत में धर्मचक्र प्रवर्तन सूत्र कहा जाता है। इसी उपदेश के साथ बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बुद्ध के धम्म का प्रचार-प्रसार प्रारंभ हुआ।
इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रत्येक वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस मनाया जाता है। यह दिन बौद्ध अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।
शांति, करुणा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का आह्वान
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने, समाज में शांति, करुणा, अहिंसा और मानवता के मूल्यों को बढ़ावा देने तथा उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक गरिमा का वातावरण बना रहा, जिससे सारनाथ एक बार फिर भगवान बुद्ध के सार्वभौमिक संदेश का केंद्र बन गया।
