वाराणसी (रणभेरी): श्रावण मास, कांवड़ यात्रा और महाशिवरात्रि को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। गुरुवार को पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक पैदल भ्रमण कर सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पूरे श्रावण माह में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन सर्वोच्च प्राथमिकता रहे।
शहर को 5 जोन और 15 सेक्टर में बांटा गया
श्रावण के दौरान काशी विश्वनाथ धाम और अन्य प्रमुख शिवालयों में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पूरे शहर को पांच जोन और 15 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पांच आईपीएस अधिकारी करेंगे, जबकि 50 राजपत्रित अधिकारियों के साथ करीब पांच हजार पुलिसकर्मी अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहेंगे। अधिकारी लगातार फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।
श्रावण सोमवार और शिवरात्रि पर अतिरिक्त सतर्कता
प्रशासन का विशेष फोकस श्रावण के सभी सोमवार और महाशिवरात्रि पर रहेगा। इन दिनों श्री काशी विश्वनाथ मंदिर समेत प्रमुख मंदिरों और आसपास के मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग, डायवर्जन और पैदल मार्गों की अलग व्यवस्था लागू रहेगी, ताकि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन कराए जा सकें।
प्रमुख स्थानों पर बनेंगे खोया-पाया केंद्र
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रमुख मार्गों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में खोया-पाया केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यदि कोई श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ जाता है तो इन केंद्रों के माध्यम से उसे शीघ्र मिलाने की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा मंदिर मार्ग और संवेदनशील स्थानों पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की भी तैनाती रहेगी, जो संदिग्ध गतिविधियों और असामाजिक तत्वों पर नजर रखेंगे।
CCTV और त्रिनेत्र सिस्टम से होगी 24 घंटे निगरानी
श्रावण मेले के दौरान शहर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह तकनीक आधारित भी रहेगी। पहले से स्थापित सीसीटीवी कैमरों के साथ त्रिनेत्र प्रणाली के जरिए प्रमुख मार्गों, मंदिर परिसर और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। काशी विश्वनाथ मंदिर के कंट्रोल रूम से लगातार मॉनिटरिंग होगी। वहीं रेलवे स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी कैमरों के जरिए गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
गंगा घाटों पर जल पुलिस और गोताखोर रहेंगे तैनात
गंगा स्नान के दौरान किसी भी हादसे से बचाव के लिए प्रमुख घाटों पर जल पुलिस, पीएसी, बाढ़ राहत पुलिस और प्रशिक्षित गोताखोर तैनात किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए घाटों पर विशेष बैरिकेडिंग की जाएगी। जल पुलिस मोटरबोट के माध्यम से लगातार निगरानी करती रहेगी।
कांवड़ियों के लिए अलग लेन, रास्ते में मिलेगी हर सुविधा
कांवड़ यात्रा को सुचारु रखने के लिए प्रयागराज से मोहनसराय तक एक लेन केवल कांवड़ यात्रियों के लिए आरक्षित रहेगी। यात्रा मार्ग पर अस्थायी पुलिस सहायता केंद्र बनाए जाएंगे। साथ ही विश्राम स्थल, पेयजल, प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सुविधाओं की भी व्यवस्था रहेगी, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
हर चार किलोमीटर पर पुलिस की त्वरित सहायता
कांवड़ मार्ग पर प्रत्येक चार किलोमीटर की दूरी पर पीआरवी और फैंटम टीम की तैनाती की जाएगी। किसी भी दुर्घटना, विवाद या आपात स्थिति की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंचेगी। इससे आपदा या अन्य घटनाओं में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।
डीजे संचालन पर रहेगा प्रशासन का नियंत्रण
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ यात्रा और श्रावण मास के दौरान डीजे केवल न्यायालय द्वारा निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर ही संचालित किए जा सकेंगे। साथ ही डीजे की ऊंचाई और संरचना भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप रखनी होगी, जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
ट्रैफिक जाम रोकने के लिए लागू होगी RTC योजना
श्रावण मेले के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन (RTC) योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। भीड़ वाले इलाकों में वैकल्पिक मार्ग, ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय नागरिकों को भी आवागमन में कम से कम परेशानी हो।
प्रशासन का कहना है कि पूरे श्रावण मास के दौरान सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की लगातार निगरानी की जाएगी। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि काशी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
