खरमास समाप्त, अब गूंजेंगी शहनाइयां

खरमास समाप्त, अब गूंजेंगी शहनाइयां
  • सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ शुभ कार्यों पर लगा विराम खत्म
  • अप्रैल से जुलाई तक 38 शुभ मुहूर्त, बाजारों में लौटी रौनक

वाराणसी (रणभेरी)। सनातन परंपराओं और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार खरमास की समाप्ति के साथ आज से मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत हो रही है। वैशाख कृष्ण द्वादशी की बेला में सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिसके साथ ही विवाह सहित सभी शुभ कार्यों पर लगा एक माह का विराम समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी। ज्योतिषाचार्य विकास पाण्डेय के अनुसार विवाह को सनातन संस्कारों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इसके आयोजन में ग्रहों की अनुकूल स्थिति का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ स्थिति में होना आवश्यक माना गया है। खासतौर पर सूर्य और देवगुरु बृहस्पति का संतुलन वैवाहिक जीवन की स्थिरता और सफलता का कारक होता है।

बनारसी पंचांग के अनुसार इस वर्ष अप्रैल से जुलाई के बीच कुल 38 विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं। हालांकि मई के मध्य से जून के मध्य तक मलमास के प्रभाव के चलते 17 मई से 15 जून तक शादियों पर अस्थायी विराम रहेगा। इसके अतिरिक्त वृष, मिथुन और कन्या लग्न के साथ अश्विनी, रोहिणी और हस्त जैसे शुभ नक्षत्र इस विवाह सीजन को अत्यंत फलदायी बना रहे हैं।
शुभ तिथियों की शुरुआत के साथ ही बाजारों में भी जबरदस्त रौनक लौट आई है। बैंकेट हॉल, कैटरिंग सेवाएं, आभूषण विक्रेता और वस्त्र व्यापारियों के यहां ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी है। 15 अप्रैल से शुरू होकर मई के प्रथम पखवाड़े तक विवाहों की धूम रहेगी, जबकि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के प्रारंभ में भी बड़ी संख्या में शादियां संपन्न होंगी। खरमास की विदाई ने धार्मिक उत्साह के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति दी है, जिससे आने वाले महीनों में उत्सव और उल्लास का माहौल बना रहेगा।

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