Breaking News: मामूली शिकायत का खौफनाक अंजाम, 4 लोगों के कत्ल के दोषी को फांसी, 10 साल बाद आया फैसला

Breaking News: मामूली शिकायत का खौफनाक अंजाम, 4 लोगों के कत्ल के दोषी को फांसी, 10 साल बाद आया फैसला

वाराणसी के चोलापुर के चंदापुर गांव में 2013 में हुई थी सनसनीखेज वारदात, अदालत ने कहा-दुर्लभतम श्रेणी का अपराध

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी में करीब एक दशक पहले मामूली शिकायत के चलते एक ही परिवार के चार लोगों की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। फैसले के बाद चोलापुर थाना क्षेत्र के चंदापुर गांव में उस खौफनाक घटना की यादें फिर से ताजा हो गईं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने पूरी योजना के साथ इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था, इसलिए इसे दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए कठोरतम सजा दी जानी जरूरी है।

क्या था पूरा मामला

घटना 29 अक्टूबर 2013 की रात चोलापुर थाना क्षेत्र के चंदापुर गांव में हुई थी। गांव के बाहर जल निगम के ऑपरेटर मोहनलाल जायसवाल का घर था। घर के पीछे स्थित बाग में अक्सर संदिग्ध लोगों का जमावड़ा लगता था, जहां जुआ, शराब और दावत का दौर चलता रहता था। इसी बात को लेकर मोहनलाल ने आरोपी रविन्द्र उर्फ राजू के घर शिकायत की थी कि वह गलत संगत में पड़ गया है। घरवालों की डांट से आहत राजू ने इसे अपनी बेइज्जती मान लिया और उसी समय पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रच डाली।

छत के रास्ते घर में घुसकर किया हमला

29 अक्टूबर 2013 की रात करीब साढ़े आठ बजे आरोपी पास के निर्माणाधीन मकान से लोहे की रॉड लेकर छत के रास्ते घर में घुस गया। उसी समय मोहनलाल शौचालय से बाहर निकल रहे थे, तभी आरोपी ने उनके सिर पर वार कर दिया। इसके बाद उसने मोहनलाल की पत्नी झूना देवी, बेटी पूजा और बेटे प्रदीप पर भी बेरहमी से हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। प्रदीप ने खुद को बचाने की कोशिश में लाठी से वार भी किया, जबकि संदीप गंभीर रूप से घायल हो गया और हमलावर को पहचान लिया।

वारदात के बाद भीड़ में ही शामिल हो गया था आरोपी

हत्या के बाद आरोपी छत पर पहुंचा, लेकिन लोगों की आवाज सुनकर पीछे की ओर कूद गया, जिससे उसके पैर में चोट लग गई। इसके बावजूद वह मौके पर जुटी भीड़ में शामिल हो गया और बाद में एक युवक के साथ साइकिल से घर चला गया। घर पहुंचकर उसने खून से सने कपड़ों को जला दिया और शक से बचने के लिए दो दिन तक अस्पताल में अपने घायल पैर का इलाज भी कराया। हालांकि पुलिस जांच में पूरी सच्चाई सामने आ गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। करीब दस साल तक चले इस चर्चित हत्याकांड के मुकदमे में अब अदालत ने आरोपी रविन्द्र उर्फ राजू को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है।

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