एसओजी-2 के हनक पर भारी “राजेश टाईट” का भौकाल !

एसओजी-2 के हनक पर भारी “राजेश टाईट” का भौकाल !

AI द्वारा संपादित प्रतीकात्मक फोटो

  • आदमपुर में जुआ नेटवर्क की दमदार वापसी, पुलिस संरक्षण के आरोपों ने फिर उठाए सवाल
  • दीपावली से पहले अंसाराबाद में लाखों के दांव का दावा, बिहार-झारखंड समेत पूर्वांचल के बुकरों को बुलाने की चर्चा
  • ‘पीडीए’ नेटवर्क का मतलब पुल्लू,दीपक,अन्नू

वाराणसी (रणभेरी): रणभेरी में जुए के कथित साम्राज्य और ‘पीडीए’ नेटवर्क को लेकर प्रकाशित खोजी रिपोर्ट के बाद आदमपुर थाना क्षेत्र में जुए का खेल कुछ समय के लिए बंद होने की जानकारी सामने आई थी। लेकिन अब सूत्रों से मिली नई जानकारी ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि पिछले दो दिनों से आदमपुर थाना क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जुए का खेल फिर शुरू हो गया है। आरोप है कि इस बार भी कथित नेटवर्क को स्थानीय पुलिस की सहमति और संरक्षण प्राप्त है।

खबर का असर कुछ दिन, फिर वही कथित खेल!

सूत्रों के मुताबिक, आदमपुर थाना क्षेत्र के अंसाराबाद मोहल्ले के अंदर अन्नू यादव के संरक्षण में जुए की महफिल फिर सजने लगी है। बताया जा रहा है कि शहर के बड़े-बड़े जुआरी लाखों रुपये की हार-जीत वाले इस खेल में शामिल हो रहे हैं। दीपावली के त्योहार को देखते हुए जुए के इस नेटवर्क को और बड़े स्तर पर संचालित करने की तैयारी की गई है। आरोप है कि अन्नू यादव की देखरेख में जुए का संचालन फिर शुरू कराया गया है। सूत्रों का दावा है कि बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के अन्य जिलों से बड़े-बड़े बुकरों को भी आमंत्रित किया गया है।

पुलिस की भूमिका पर फिर सवाल

सबसे गंभीर आरोप स्थानीय पुलिस की कथित भूमिका को लेकर है। दावा किया जा रहा है कि जिस जुआ नेटवर्क पर रणभेरी की पिछली रिपोर्ट के बाद कुछ समय के लिए विराम लगा था, वह अब फिर से सक्रिय हो गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि आदमपुर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जुए का खेल चल रहा है, तो स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? और यदि जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

क्या पिछली खबर के बाद हुई कार्रवाई केवल कुछ दिनों तक सीमित रही? क्या जुआ संचालकों ने पुलिस की निगरानी से बचने के लिए अपना ठिकाना बदला था, या फिर कथित नेटवर्क को दोबारा सक्रिय होने का अवसर मिल गया?

दीपावली से पहले लाखों के दांव, प्रशासन की परीक्षा

त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि अंसाराबाद मोहल्ले में बड़े पैमाने पर जुए के संचालन की सूचना सही है, तो यह केवल अवैध जुए का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय निगरानी व्यवस्था की भी परीक्षा है।

एसओजी-2 के हनक पर भारी “राजेश टाईट” का भौकाल !

AI द्वारा संपादित प्रतीकात्मक फोटो

रणभेरी प्रशासन से मांग करता है कि अंसाराबाद में कथित जुआ संचालन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि जुआ कहां और किसकी देखरेख में चल रहा है, इसमें किन लोगों की भूमिका है और स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी थी या नहीं।
यदि पुलिस संरक्षण अथवा मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

जुआ नेटवर्क में ‘राजेश टाइट’ की कथित एंट्री

आदमपुर थाना क्षेत्र में कथित जुआ नेटवर्क के दोबारा सक्रिय होने के बीच अब एक और नाम चर्चा में है “राजेश टाइट”। सूत्रों का दावा है कि राजेश टाइट जुआ संचालकों और पुलिस प्रशासन के बीच कथित सेटर की भूमिका निभाता है। आरोप है कि उसकी पकड़ और सेटिंग-गेटिंग इतनी मजबूत है कि जुआ संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की राह में भी उसकी भूमिका प्रभावी बताई जा रही है।

दर्जन भर सिरप कारोबारियों का भी सेटर था राजेश

सूत्रों के मुताबिक, कुछ महीने पहले कोडीन कफ सिरप कारोबार के खुलासे के बाद भी राजेश टाइट का नाम चर्चा में आया था। दावा किया जाता है कि उसका करीब एक दर्जन सिरप कारोबारियों से संपर्क था और उसने कथित तौर पर कई कारोबारियों को पुलिस की पकड़ से बाहर निकलने में मदद की थी। अब एक बार फिर उसका नाम जुआ नेटवर्क के संदर्भ में सामने आने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस और कथित जुआ संचालकों के बीच कोई ऐसा मध्यस्थ सक्रिय है, जिसकी पहुंच के आगे कार्रवाई की सख्ती भी कमजोर पड़ रही है? सूत्रों का यह भी दावा है कि एसओजी-2 की कार्रवाई के बावजूद कथित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। हालांकि, राजेश टाइट की भूमिका, सिरप कारोबारियों से उसके संबंध और पुलिस कार्रवाई में कथित हस्तक्षेप के आरोपों के बीच अब जुआ संचालकों में राजेश की गहरी पैठ ने कई सवाल खड़े कर दिए है ? यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल जुआ संचालन का मामला नहीं, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों और कथित अपराध नेटवर्क के बीच संभावित मिलीभगत की गंभीर जांच का विषय है।

काशी के युवाओं और परिवारों की बर्बादी का सवाल

जुए की लत से बचत खत्म होने, कर्ज बढ़ने, पारिवारिक विवाद और मानसिक संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। यदि वाराणसी में अवैध जुआ संचालन बड़े पैमाने पर हो रहा है, तो उसका असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव युवाओं और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में जरूरत केवल जुआ अड्डों पर कार्रवाई की नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए जागरूकता, परामर्श और सहायता की व्यवस्था करने की भी है।

आदमपुर में जुए के कथित कारोबार से जुड़ा कोड चर्चा में

कल तक दबी जुबान चर्चा में रहा ‘पीडीए’ अब रणभेरी की खोजी पड़ताल का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। सूत्रों के दावे के मुताबिक, यह किसी सरकारी योजना का नाम नहीं, बल्कि तीन कथित जुआ संचालकों के नाम के शुरुआती अक्षरों से बना कोड है। दावा है कि ‘पी’ से पुल्लू यादव, ‘डी’ से दीपक यादव और ‘ए’ से अन्नू यादव का संकेत मिलता है।

‘पीडीए’ कोड बताने पर बैग की तलाशी नहीं होने का दावा

इस कथित नेटवर्क का सबसे चौंकाने वाला दावा नकदी से भरे बैग की तलाशी से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, जुए के खेल से लौटते समय कुछ लोगों के बीच ‘पीडीए’ नाम का इस्तेमाल किया जाता है। आरोप है कि इस नाम का उल्लेख करने पर कथित तौर पर रूपयों से भरे जुआरियों के बैग की तलाशी नहीं होती।

एसओजी-2 की कार्रवाई पर सवाल, आदमपुर के जुआ नेटवर्क पर आखिर क्यों मेहरबानी?

वाराणसी में अवैध जुआ संचालन के खिलाफ एसओजी-2 की कार्रवाई लगातार चर्चा में है। शहर के अलग-अलग इलाकों में जुआ संचालकों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन आदमपुर थाना क्षेत्र में कथित तौर पर सक्रिय जुआ नेटवर्क को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? आखिर क्या वजह है कि शहर के दूसरे इलाकों में कार्रवाई करने वाली पुलिस आदमपुर के कथित जुआ संचालकों के मामले में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा पा रही है? क्या इसके पीछे कोई दबाव है, या फिर स्थानीय स्तर पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका जांच के दायरे में आनी चाहिए?

इस पूरे मामले में अब राजेश टाईट नाम के एक व्यक्ति की कथित भूमिका बड़े चर्चा में है। सूत्रों का दावा है कि जुआ संचालकों और पुलिस महकमे के बीच संपर्क स्थापित करने में उसकी अहम भूमिका है। आरोप यह भी हैं कि उसकी कथित सेटिंग-गेटिंग के कारण आदमपुर क्षेत्र में जुए के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

यदि शहर के अन्य क्षेत्रों में जुआ संचालकों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, तो आदमपुर थाना क्षेत्र में कथित नेटवर्क को लेकर अलग स्थिति क्यों दिखाई दे रही है? क्या एसओजी-2 को इस क्षेत्र में जुए के संचालन की जानकारी नहीं है, या फिर किसी स्तर पर कार्रवाई को प्रभावित किया जा रहा है? यदि किसी व्यक्ति की कथित पहुंच पुलिस की कार्रवाई पर असर डाल रही है, तो यह केवल अवैध जुए का मामला नहीं, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है।

अब सवाल यह है कि क्या एसओजी-2 आदमपुर के कथित जुआ नेटवर्क पर भी उसी सख्ती से कार्रवाई करेगी, जैसी कार्रवाई शहर के दूसरे इलाकों में की जा रही है? आखिर राजेश टाईट नाम के इस व्यक्ति की कथित भूमिका क्या है और क्या पुलिस महकमे पर उसके प्रभाव के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?

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