19 रात और 20 दिन में काशी से कोलकाता पहुंचेगा गंगा विलास, शनिवार को होगा रवाना

19 रात और 20 दिन में काशी से कोलकाता पहुंचेगा गंगा विलास, शनिवार को होगा रवाना

काशी से कोलकाता तक गंगा के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वैभव से रूबरू होंगे पर्यटक, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख पड़ावों से गुजरेगा लग्जरी क्रूज

वाराणसी (रणभेरी): काशी में विदेशी पर्यटकों को गंगा की सैर कराने के बाद लग्जरी रिवर क्रूज गंगा विलास शनिवार को कोलकाता के लिए रवाना होगा। रामनगर स्थित मल्टीमॉडल टर्मिनल से शाम करीब चार बजे क्रूज अपनी यात्रा शुरू करेगा। वाराणसी से कोलकाता तक का यह सफर 19 रात और 20 दिनों का होगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार क्रूज 18 नवंबर को कोलकाता पहुंचेगा। इस दौरान पर्यटक गंगा किनारे बसे ऐतिहासिक शहरों, धार्मिक स्थलों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होंगे।

क्रूज संचालक अंतरा के राज सिंह ने बताया कि गंगा विलास 27 अक्तूबर को विदेशी पर्यटकों को लेकर रामनगर स्थित मल्टीमॉडल टर्मिनल पहुंचा था। काशी प्रवास के दौरान पर्यटकों को गंगा आरती के दर्शन कराने के साथ ही शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण कराया गया। अब शनिवार को क्रूज कोलकाता के लिए रवाना होगा। इस यात्रा में छह भारतीय और स्विट्जरलैंड के 10 पर्यटक सवार होंगे।

बिहार के कई शहरों से होकर गुजरेगा क्रूज

रामनगर से रवाना होने के बाद गंगा विलास गाजीपुर, बक्सर और पटना समेत बिहार के विभिन्न पड़ावों से होकर पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा। इसके बाद फरक्का लॉक गेट पार कर क्रूज हुगली नदी के जलमार्ग से पश्चिम बंगाल में प्रवेश करेगा। यहां जंगीपुर, मुर्शिदाबाद, मटियारी और कालना में पर्यटकों के भ्रमण का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

हजारद्वारी पैलेस और 108 शिव मंदिर होंगे आकर्षण

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में पर्यटकों को ऐतिहासिक हजारद्वारी पैलेस और कटर मस्जिद का भ्रमण कराया जाएगा। वहीं, कालना में 108 शिव मंदिरों वाला राजबाड़ी मंदिर परिसर आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा। मटियारी में पर्यटकों को पारंपरिक धातु शिल्प की बारीकियों से रूबरू होने और स्थानीय कारीगरों की कला देखने का अवसर मिलेगा।

कोलकाता में फूल बाजार और कुम्हारटोली का करेंगे भ्रमण

यात्रा के अंतिम पड़ाव में गंगा विलास कोलकाता पहुंचेगा। यहां पर्यटकों के लिए प्रसिद्ध फूल बाजार, कुम्हारटोली और मदर टेरेसा के स्मारक स्थल के भ्रमण का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इस तरह काशी से शुरू होने वाली यह यात्रा गंगा के रास्ते उत्तर भारत और बंगाल की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर प्रदान करेगी।

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