वाराणसी (रणभेरी): आईआईटी बीएचयू में हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की प्रमुख सुविधा परम शिवाय सुपर कंप्यूटर फिलहाल नए कंप्यूटेशनल कार्यों के लिए उपलब्ध नहीं है। सिस्टम पर नए जॉब सबमिट नहीं किए जा रहे हैं। हालांकि, यूजर्स को सर्वर में पहले से मौजूद महत्वपूर्ण डेटा डाउनलोड करने और उसका बैकअप सुरक्षित रखने की सुविधा दी जा रही है।
संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक परम शिवाय को स्थायी रूप से बंद करने का फैसला नहीं लिया गया है। सर्वर में आवश्यक तकनीकी सुधार, मरम्मत और आधुनिकीकरण का काम चल रहा है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंप्यूटिंग सेवाओं को फिर से शुरू किए जाने की उम्मीद है।
पांच सितंबर से प्रभावित हुई सेवाएं
परम शिवाय की सेवाओं को लेकर जारी किए गए एक पुराने संदेश के बाद यूजर्स के बीच इसके स्थायी रूप से बंद होने की चर्चा शुरू हो गई थी। संदेश में बताया गया था कि पांच सितंबर से सिस्टम की नियमित कंप्यूटिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी। इस अवधि में यूजर्स को अपने जरूरी डेटा को सुरक्षित करने और उसका बैकअप लेने की सलाह दी गई थी।
सिस्टम के SLURM कंप्यूट-नोड कॉन्फिगरेशन को हटाए जाने के कारण नए कंप्यूटिंग जॉब भेजने की सुविधा भी प्रभावित हुई। यूजर्स को सर्वर पर रखे आवश्यक डेटा को समय रहते डाउनलोड करने के लिए रिमाइंडर जारी किया गया था।
NSM की दूसरी सुविधाओं का विकल्प
जिन शोधकर्ताओं को तत्काल हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग संसाधनों की आवश्यकता है, उन्हें नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत उपलब्ध अन्य कंप्यूटिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करने का विकल्प बताया गया है। इसके लिए संबंधित पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।
2019 में शुरू हुई थी सुविधा
आईआईटी बीएचयू में परम शिवाय सुपर कंप्यूटर की स्थापना 19 फरवरी 2019 को इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के समीप स्थित भवन में की गई थी। इसके बाद यह संस्थान के साथ-साथ बीएचयू और देश के विभिन्न शोध संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिकों के लिए हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का अहम संसाधन बना।

इसका इस्तेमाल जटिल वैज्ञानिक गणनाओं, बड़े डेटा सेट के विश्लेषण, सिमुलेशन और विभिन्न शोध परियोजनाओं में किया जाता रहा है। आईआईटी बीएचयू और बीएचयू के कई शोध कार्य भी इसकी कंप्यूटिंग क्षमता पर निर्भर रहे हैं।
कई शोध क्षेत्रों में उपयोग
परम शिवाय जैसे हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम का इस्तेमाल वैज्ञानिक शोध के कई क्षेत्रों में किया जाता है। इनमें मौसम और जलवायु से जुड़े मॉडल, अंतरिक्ष इंजीनियरिंग, भूकंपीय अध्ययन, वित्तीय मॉडलिंग, आपदा प्रबंधन से जुड़े सिमुलेशन और बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग प्रमुख हैं।
ऐसे में कंप्यूटिंग सुविधा के अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं होने से उन शोध परियोजनाओं की गति प्रभावित हो सकती है, जिनमें भारी गणनात्मक संसाधनों की जरूरत होती है।

मरम्मत के साथ किया जा रहा आधुनिकीकरण
सुपर-कंप्यूटिंग सेंटर की सिस्टम एनालिस्ट डॉ. निशा सिंह के अनुसार, पांच सितंबर से सर्वर के रखरखाव और तकनीकी सुधार का काम चल रहा है। सिस्टम में आवश्यक मरम्मत के साथ इसे अधिक आधुनिक और बेहतर क्षमता वाला बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
संस्थान की ओर से साफ किया गया है कि यह प्रक्रिया स्थायी बंदी नहीं है। तकनीकी कार्य और अपग्रेडेशन पूरा होने के बाद परम शिवाय की कंप्यूटिंग सेवाएं दोबारा शुरू की जाएंगी। आगे की स्थिति की जानकारी यूजर्स को संस्थान की ओर से दी जाएगी।
