वाराणसी (रणभेरी): धर्मनगरी काशी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बीते दो दिनों से जलस्तर में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिसके चलते शहर के कई प्रमुख घाटों की निचली सीढ़ियां और गंगा तट पर बने छोटे मंदिर पानी में समा गए हैं। लगातार हो रही बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी का असर अब वाराणसी के घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। हालांकि फिलहाल गंगा खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है, लेकिन प्रशासन और नाविक समाज ने एहतियाती तैयारियां तेज कर दी हैं।

शुक्रवार को गंगा का जलस्तर बढ़कर लगभग 62.72 मीटर तक पहुंच गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार नदी का स्तर करीब 5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से बढ़ रहा है। पिछले 12 घंटों में जलस्तर में करीब 30 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान स्तर चेतावनी और खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

बढ़ते जलस्तर का असर शहर के कई प्रमुख घाटों पर दिखाई देने लगा है। दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, पांडेय घाट, चौसट्टी घाट, अहिल्याबाई घाट, शीतला घाट, त्रिपुरा भैरवी घाट, ललिता घाट, गाय घाट, पंचगंगा घाट सहित कई घाटों की निचली सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। गंगा किनारे बने छोटे-छोटे मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित होने लगी है।
हरिश्चंद्र घाट स्थित शवदाह स्थल के समीप तक गंगा का पानी पहुंच चुका है, जबकि शिवाला घाट का संपर्क कुछ हिस्सों से प्रभावित बताया जा रहा है। नदी में बड़ी मात्रा में जलकुंभी बहकर आने से नाव संचालन और घाटों पर आवागमन में भी दिक्कतें बढ़ी हैं।

इधर बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मां गंगा निषाद राज सेवा समिति ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी शुरू कर दी है। समिति के कार्यकारिणी सदस्य जितेंद्र कुमार निषाद (बम्बू जी) ने बताया कि सभी नाविकों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए नावों पर निर्धारित क्षमता से कम लोगों को बैठाया जा रहा है और प्रत्येक यात्री को लाइफ जैकेट पहनाकर ही नौका विहार कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि काशी के सभी प्रमुख घाटों पर नाविक समाज को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई कांवरिया, श्रद्धालु या अन्य व्यक्ति गंगा में डूबता हुआ दिखाई देता है तो नाविक तत्काल राहत एवं बचाव कार्य में जुटेंगे और आवश्यकता पड़ने पर अपनी जान जोखिम में डालकर भी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास करेंगे।

जिला प्रशासन ने भी गंगा तट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील घाटों पर बैरिकेडिंग की जा रही है और लोगों से नदी के बढ़े हुए जलस्तर के पास न जाने की अपील की गई है। जल पुलिस, एनडीआरएफ, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य संबंधित एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं। आपदा मित्रों की टीमें भी तटीय क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दे रही हैं।
केवल गंगा ही नहीं, बल्कि वरुणा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। पुराना पुल क्षेत्र और आसपास की निचली बस्तियों में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय लोग भी सतर्क हो गए हैं और संभावित जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

मौसम विभाग के अनुसार वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में अगले 24 घंटों के दौरान बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि वर्षा का क्रम जारी रहता है और ऊपरी क्षेत्रों से पानी छोड़ा जाता है, तो गंगा और वरुणा दोनों नदियों का जलस्तर आगे भी बढ़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन, नाविक समाज और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, प्रशासन की सलाह का पालन करें और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करें।
