- करोड़ों फूंकने के बाद भी हरिहरपुर-गोविंदपुर में सूखे पड़े नल
- कार्य पूर्ण का बोर्ड, चार साल बाद भी एक बूंद पानी नहीं, ग्रामीण बोले- बाल्टी लेकर दूसरों के दरवाजे जाना पड़ता है
- पांच हजार की आबादी बूंद-बूंद को मोहताज, बंद फिटर रूम और सूखी टंकी खोल रही पोल
वाराणसी (रणभेरी): प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी हर घर जल-जल जीवन मिशन योजना रोहनिया थाना क्षेत्र के हरिहरपुर-गोविंदपुर ग्राम सभा में कागजों और बोर्डों तक सिमटकर रह गई है। सरकारी दस्तावेजों में योजना का कार्य पूरा हो चुका है, करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चार वर्षों से गांव के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकने को मजबूर हैं।

जल निगम (ग्रामीण) वाराणसी की कार्यदायी संस्था लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड द्वारा हरिहरपुर पेयजल योजना के तहत गांव में पेयजल व्यवस्था तैयार की गई। योजना की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई और कार्य पूर्ण होने की तिथि 16 जून 2024 दर्शाई गई है। योजना पर कुल 38.253 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अंतर्गत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया, बोरिंग हुई, 15,263 मीटर भूमिगत पाइप लाइन बिछाई गई और करीब 1000 घरों में नल कनेक्शन भी दिए गए।
लेकिन स्थिति यह है कि करोड़ों की लागत से खड़ी हुई व्यवस्था आज भी ग्रामीणों के लिए केवल दिखावा साबित हो रही है। गांव में बने फिटर रूम पर ताला लटका हुआ है और नलों से आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं निकली। कार्य पूर्ण होने का बोर्ड सरकारी दावों की कहानी कहता है, जबकि सूखे पड़े नल उसकी सच्चाई बयान कर रहे हैं।

करीब 5000 की आबादी वाले इस गांव के लोगों का कहना है कि वे आज भी पुराने तरीकों से पानी जुटाने को मजबूर हैं। कोई निजी बोरिंग से पानी भर रहा है तो कोई दूर लगे हैंडपंपों का सहारा ले रहा है। कई परिवार पड़ोसियों के यहां जाकर पानी मांगने को मजबूर हैं।

एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सुबह-सुबह बाल्टी लेकर दूसरे के घर पानी मांगने जाना बेहद अपमानजनक लगता है। कई बार लोग मना भी कर देते हैं, जिससे स्थिति और असहज हो जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले चार वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक सप्लाई शुरू नहीं हुई। न ग्राम प्रधान ने कोई पहल की और न ही जल निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस दिशा में गंभीरता दिखाई।
करोड़ों रुपये खर्च होने और योजना पूर्ण होने के बावजूद लोगों को पानी न मिलना अब ग्रामीणों में आक्रोश का कारण बन चुका है। सवाल उठ रहा है कि जब सब कुछ तैयार है, तो आखिर पानी किस फाइल में फंसा हुआ है ? गांव में ‘हर घर जल’ का सपना फिलहाल सिर्फ बोर्डों और सरकारी कागजों में ही बहता दिखाई दे रहा है।
