वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी पुलिस महकमे में एक बार फिर रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। केस से नाम हटाने के बदले ₹50 हजार की मांग और ₹20 हजार की रिश्वत लेने के आरोप में काशी विद्यापीठ चौकी प्रभारी दरोगा शिवाकर मिश्रा और उसके कारखास सिपाही गौरव कुमार द्विवेदी को निलंबित कर दिया गया है।
डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं पुलिस कमिश्नर ने दरोगा की सेवा फाइल और गोपनीय रिपोर्ट भी तलब कर ली है। मौजूदा नीति के तहत निलंबन के बाद अगले एक साल तक दरोगा को किसी भी चार्ज पर तैनाती मिलना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक यदि विभागीय जांच में पुराने मामलों की परतें खुलीं तो दोनों आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। दिलचस्प यह भी है कि कार्रवाई से पहले पुलिस विभाग के भीतर ही कुछ अधिकारी दरोगा को बचाने की कोशिशों में जुटे रहे।
आज एंटी करप्शन कोर्ट में पेशी
एंटी करप्शन टीम आरोपी दरोगा और सिपाही को कोर्ट नंबर-5 में पेश करेगी। न्यायिक रिमांड के लिए एफआईआर और प्राथमिक साक्ष्य कोर्ट के समक्ष रखे जाएंगे, जिसके बाद जेल भेजे जाने की कार्रवाई होगी।
कैसे शुरू हुआ रिश्वत का खेल
2019 बैच के दरोगा शिवाकर मिश्रा की पहली पोस्टिंग वाराणसी में हुई थी। ट्रेनिंग के बाद उसे काशी जनपद आवंटित हुआ। शुरुआत में थाने पर तैनाती, फिर चौकियों की जिम्मेदारी मिली। एक इंस्पेक्टर से नजदीकियां बढ़ने के बाद लंका थाना क्षेत्र की कई चौकियों पर उसकी लंबी तैनाती रही।
हाल ही में उसका तबादला सिगरा थाना क्षेत्र के काशी विद्यापीठ चौकी पर हुआ। आरोप है कि ज्वाइनिंग के कुछ ही दिनों बाद उसने लंबित विवेचनाओं को खंगालना शुरू किया और कमजोर केस फाइलों को निशाने पर ले लिया।

पीड़ित से सौदेबाज़ी
इसी दौरान चंदौली के अलीनगर मुगलचक निवासी प्रहलाद गुप्ता का मामला सामने आया। पत्नी ममता गुप्ता से विवाद के चलते उसके खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज थे। इनमें एक केस जेल में रहते हुए दर्ज होने का भी जिक्र है। आरोप है कि दरोगा ने सिपाही गौरव द्विवेदी के जरिए प्रहलाद को चौकी बुलवाया और चार्जशीट का डर दिखाया। केस से राहत के बदले पहले ₹50 हजार की मांग की गई। मोलभाव के बाद सौदा ₹20 हजार में तय हुआ।
रंगे हाथों दबोचे गए
प्रहलाद ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की। तय योजना के तहत 28 जनवरी को इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह के नेतृत्व में टीम चौकी पहुंची। दरोगा ने पैसे लेने से इनकार करते हुए सिपाही को लेने के लिए कहा। शिकायतकर्ता ने जैसे ही ₹20 हजार सिपाही को दिए, टीम ने छापा मार दिया। सिपाही ने नोट छिपाने की कोशिश की, लेकिन रकम बरामद कर ली गई। शाम करीब छह बजे दरोगा और सिपाही दोनों को गिरफ्तार कर लालपुर-पांडेयपुर थाने लाया गया। पूछताछ में सिपाही ने स्वीकार किया कि उसने दरोगा के कहने पर पैसे लिए थे। इसके बाद एंटी करप्शन इंस्पेक्टर की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया और दोनों को निलंबित कर दिया गया।
पत्नी का आरोप: साजिश के तहत फंसाया गया
दरोगा की पत्नी शिवानी मिश्रा ने पूरे मामले को साजिश बताया है। उनका कहना है कि एंटी करप्शन टीम ने जबरन उनके पति को फंसाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
