वाराणसी (रणभेरी): गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से वाराणसी में तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। शनिवार को गंगा का जलस्तर 69.04 मीटर तक पहुंच गया। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पानी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। गंगा का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर निर्धारित है। ऐसे में जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 1.22 मीटर नीचे है।
जलस्तर में वृद्धि का असर शहर के प्रमुख घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। रविदास घाट से लेकर नमो घाट तक कई हिस्सों में गंगा का पानी तेजी से ऊपर की ओर फैल रहा है। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस का मंच पूरी तरह पानी में डूब गया है। वहीं दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस चौकी की दहलीज तक पानी पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
घाटों पर बढ़ी निगरानी, स्नानार्थियों को सावधानी की सलाह
गंगा का पानी बढ़ने के साथ प्रशासनिक अमला और सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। राजस्व विभाग की टीमें जलस्तर की निगरानी कर रही हैं। घाटों पर तैनात जल पुलिस और एनडीआरएफ के जवान लोगों को गहरे पानी में नहीं जाने और सावधानी के साथ स्नान करने की सलाह दे रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए घाटों और नदी किनारे के संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लें और पानी बढ़ने वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचें।

27 अगस्त तक भारी बारिश की संभावना कम
मौसम को लेकर फिलहाल वाराणसी के लिए राहत की स्थिति बताई जा रही है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनोज श्रीवास्तव के अनुसार मानसून की द्रोणिका का पश्चिमी सिरा अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसका हुआ है। इसके चलते वाराणसी में फिलहाल तेज बारिश की संभावना कम है।
उनके मुताबिक 27 अगस्त तक शहर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के आसार नहीं हैं। हालांकि आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर रुक-रुककर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
शनिवार सुबह वाराणसी में तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति लगभग छह किलोमीटर प्रति घंटा रही और वातावरण में करीब 70 प्रतिशत नमी रही। उमस के बीच बादलों की आवाजाही से लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
वरुणा किनारे के इलाकों में भी पहुंचा पानी
गंगा के साथ वरुणा नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में भी बाढ़ का असर नजर आने लगा है। सलारपुर नाला, चमेलिया बस्ती और डिपो कॉलोनी सलारपुर के निचले हिस्सों में कई घरों तक पानी पहुंचने की सूचना है।
जलभराव की स्थिति को देखते हुए कुछ परिवारों ने एहतियातन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किराये के मकान ले लिए हैं। कुछ लोगों ने घर का जरूरी सामान पहली मंजिल पर सुरक्षित रख दिया है और परिवार के सदस्यों को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है।

छोटी मस्जिद पुरानापुल इलाके में नाले के रास्ते बाढ़ का पानी घरों की चौखट तक पहुंच गया है। करीब आधा दर्जन घर पानी से घिरे बताए जा रहे हैं। हालांकि शनिवार दोपहर तक सलारपुर के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में कोई परिवार पहुंचा नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो निचले हिस्सों में रहने वाले परिवारों को जल्द सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ सकती है।
खेतों में घुसा बाढ़ का पानी, सब्जियों की फसल प्रभावित
बाढ़ का असर अब कृषि क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। चिरईगांव ब्लॉक के ढाब क्षेत्र में निचले खेतों में पानी भरने से सब्जियों की फसल डूबने लगी है। किसानों को आशंका है कि यदि पानी कई दिनों तक खेतों में जमा रहा तो फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।
मोकलपुर गांव के किसानों लालबिहारी और श्यामबिहारी की दो बीघा से अधिक जमीन में उगाई गई नेनुआ, करैला और कुनरू की फसल पानी में डूब गई है। किसानों के सामने अब फसल बचाने के साथ आर्थिक नुकसान की चिंता भी खड़ी हो गई है।
रामचंदीपुर नखवा निवासी किसान परसू यादव ने करीब सवा बीघा खेत में हरी मिर्च की नर्सरी तैयार की थी। बाढ़ का पानी वहां भी पहुंच गया है। किसान का कहना है कि पानी जल्द नहीं निकला तो पूरी नर्सरी खराब हो सकती है।
किसानों के मुताबिक सब्जियों की खेती में लागत पहले ही काफी हो चुकी है। ऐसे में फसल खराब होने पर उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। लंबे समय तक जलभराव रहने की स्थिति में खेतों की अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।
कटान का खतरा भी बढ़ा
बाढ़ के पानी के साथ नदी किनारे कटान का खतरा भी बढ़ रहा है। कई तटवर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रहे कटाव के कारण कृषि भूमि का हिस्सा नदी में समाने लगा है। इससे किसानों की परेशानी केवल मौजूदा फसल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जमीन के कटने का खतरा भी सामने है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही और नदी की धारा का दबाव बढ़ा तो कटान की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन की निगरानी और समय रहते सुरक्षा उपायों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाढ़ चौकियों का निरीक्षण, सफाई और फॉगिंग के निर्देश
बाढ़ और कटान की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। बीडीओ एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिया सैनी ने शुक्रवार को क्षेत्र की विभिन्न बाढ़ चौकियों का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में बीमारी और मच्छरों से होने वाली परेशानियों को रोकने के लिए फॉगिंग कराने तथा ब्लीचिंग पाउडर का नियमित छिड़काव करने को भी कहा गया है।
प्रशासन का जोर फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी, लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी इंतजामों को मजबूत रखने पर है। गंगा के जलस्तर में आगे होने वाली बढ़ोतरी के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों में राहत और बचाव की तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा।
लोगों की नजर अब जलस्तर पर
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने घाटों के साथ तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल खतरे के निशान से पानी काफी नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रशासन और स्थानीय लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। खासतौर पर निचले इलाकों में रहने वाले परिवार और किसान जलस्तर में आगे होने वाले बदलाव को लेकर सतर्क हैं।
