वाराणसी (रणभेरी): विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर रविवार की शाम आयोजित होने वाली दैनिक गंगा आरती उस समय और भी विशेष बन गई, जब बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सय्यद अता हसनैन अपनी पत्नी सबिहा हसनैन के साथ आरती में शामिल हुए। काशी आगमन के दौरान उन्होंने मां गंगा का वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन किया और संध्या आरती का दर्शन कर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
राज्यपाल निर्धारित समय से पहले ही दशाश्वमेध घाट पहुंच गए थे। उनके स्वागत की व्यवस्था गंगा सेवा निधि के पदाधिकारियों द्वारा की गई। घाट पर पहुंचने के बाद उन्होंने कुछ समय तक वहां की धार्मिक गतिविधियों का अवलोकन किया और गंगा तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था को करीब से देखा। लगभग एक घंटे तक घाट पर मौजूद रहकर उन्होंने संपूर्ण आरती की प्रक्रिया को गंभीरता से देखा और उसकी भव्यता की सराहना की।
राज्यपाल के आगमन को देखते हुए घाट क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुचारु रूप से संचालित होती रही।
करीब आठ मिनट तक गूंजता रहा शंखनाद
गंगा आरती शुरू होने से पहले प्रसिद्ध शंखवादक राम जन्म योगी ने लगातार 7 मिनट 58 सेकंड तक शंखनाद किया। घाट पर गूंजती शंखध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अद्भुत प्रस्तुति को देखकर और सुनकर राज्यपाल भी प्रभावित नजर आए। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद उन्होंने राम जन्म योगी को माला पहनाकर सम्मानित किया और उनके असाधारण कौशल की सराहना की।
विजिटर बुक में दर्ज किए अपने अनुभव
गंगा आरती के बाद राज्यपाल ने गंगा सेवा निधि की विजिटर बुक में अपने अनुभव भी लिखे। उन्होंने उल्लेख किया कि विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के बारे में पहले काफी सुना था, लेकिन पहली बार इसे प्रत्यक्ष देखने का अवसर मिला। उन्होंने लिखा कि आरती का दिव्य स्वरूप, वैदिक परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था ने उनके मन को गहराई से प्रभावित किया। मां गंगा के सान्निध्य में उन्हें आध्यात्मिक शांति और विशेष आनंद की अनुभूति हुई।दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली गंगा आरती देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रविवार को राज्यपाल की उपस्थिति ने इस धार्मिक आयोजन को और भी विशेष बना दिया।
