दमनात्मक कार्रवाई पर रोक के साथ रिवीजन दाखिल करने की अनुमति
वाराणसी के किसानों की भूमि से जुड़े विवाद में राजस्व अधिकारियों की कार्रवाई पर फिलहाल रोक जैसी राहत
वाराणसी(रणभेरी संवाददाता)। वाराणसी में गंगा पार डोमरी के किसानों की भूमि से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत प्रदान करते हुए याचिकाकर्ताओं को उत्तर प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम, 1901 की धारा 219 के तहत पुनरीक्षण (रिवीजन) दाखिल करने की अनुमति दी है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता तीन सप्ताह के भीतर पुनरीक्षण के साथ स्थगन (स्टे) प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करें। यदि ऐसा किया जाता है तो सक्षम पुनरीक्षण प्राधिकारी अगले तीन सप्ताह के भीतर स्टे आवेदन का निर्णय करेगा।
न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की एकलपीठ ने राम दुलार एवं 47 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उप जिलाधिकारी द्वारा धारा 33/39 के अंतर्गत पारित आदेश के विरुद्ध कानून में पहले से ही वैधानिक वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को धारा 219 के तहत पुनरीक्षण का अधिकार प्रयोग करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि आदेश के विरुद्ध पुनरीक्षण का वैधानिक प्रावधान मौजूद है। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उप जिलाधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया है और आदेश प्रथम दृष्टया अवैध है। न्यायालय ने यह भी देखा कि इसी प्रकार के समान मामलों में पहले भी समन्वय पीठ द्वारा यही व्यवस्था दी जा चुकी है।
पूर्व में पारित आदेशों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने वर्तमान याचिका में भी वही व्यवस्था लागू की। न्यायालय ने कहा कि तीन सप्ताह के भीतर पुनरीक्षण दाखिल किए जाने पर स्टे आवेदन का निर्णय अगले तीन सप्ताह में किया जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण राहत देते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आठ सप्ताह की अवधि तक अथवा स्टे प्रार्थना पत्र पर निर्णय होने तक याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध कोई भी दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया कि उसने विवाद के गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं दिया है। याचिका का निस्तारण केवल इस व्यवस्था के साथ किया गया है कि याचिकाकर्ता कानून में उपलब्ध वैधानिक उपाय का लाभ उठाएं।
यह आदेश वाराणसी में लम्बे समय से संघर्षरत डोमरी के किसानों की भूमि से जुड़े विवादों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रभावित पक्षों को पुनरीक्षण का अवसर मिलने के साथ-साथ अंतरिम अवधि में दमनात्मक कार्रवाई से संरक्षण भी प्राप्त हुआ है।
