वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रावास आवंटन को लेकर दिव्यांग विद्यार्थियों का आक्रोश गुरुवार को सामने आया। छात्रावास की सुविधा नहीं मिलने से नाराज दिव्यांग छात्रों ने विश्वविद्यालय के सेंट्रल ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते रहे।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों को सेंट्रल ऑफिस के मुख्य द्वार पर सुरक्षाकर्मियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद छात्र वहीं बैठकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे। आंदोलन में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की प्रमुख भूमिका रही। छात्रों का कहना था कि छात्रावास आवंटन से जुड़ी समस्याओं को लेकर वे लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत कराते आ रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
खाली कमरों को दिव्यांग छात्रों को देने की मांग
विद्यार्थियों ने मांग रखी कि विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रावासों में जो कमरे खाली हैं, उन्हें छात्रावास का नियमित आवंटन होने तक जरूरतमंद दिव्यांग विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाए। छात्रों का कहना है कि उन्हें रहने के लिए लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि विश्वविद्यालय के कई छात्रावासों में कमरे उपलब्ध होने की बात सामने आती रही है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग उठाई कि छात्रावास आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने तक खाली कमरों में रहने की अनुमति बिना अतिरिक्त शर्तों के दी जाए। उनका तर्क है कि दिव्यांग विद्यार्थियों को आवास की सुविधा से वंचित रखकर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रहने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।
2014 की नियमावली के अनुपालन की मांग
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थी छात्रावास आवंटन नियमावली-2014 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। छात्रों के अनुसार, नियमावली में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रावास आवंटन को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

विद्यार्थियों का कहना है कि नियमों के तहत 40 से 100 प्रतिशत तक दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तथा 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले अन्य विद्यार्थियों को छात्रावास उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि पात्रता के बावजूद कई विद्यार्थियों को आवास नहीं मिल पा रहा है।
अधिकारियों को पत्र देने के बाद भी नहीं निकला रास्ता
आंदोलन में शामिल छात्रों ने बताया कि छात्रावास से संबंधित समस्या को लेकर विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों के साथ कई बार पत्राचार किया गया। इसके बावजूद उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। छात्रों का कहना है कि लगातार आवेदन और शिकायतें देने के बाद भी स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया, जिसके चलते उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
दिव्यांग शोधार्थी राहुल कुमार यादव ने कहा कि छात्रावास नहीं मिलने के कारण विद्यार्थियों को रहने के लिए काफी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। उनके अनुसार, नए प्रवेश लेने वाले दिव्यांग छात्र विशेष रूप से इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं।
खाली कमरे होने के बावजूद गेस्ट चार्ज लेने पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई छात्रावासों में कमरे खाली होने के बावजूद जरूरतमंद दिव्यांग विद्यार्थियों को उनका आवंटन नहीं किया जा रहा है। छात्रों का दावा है कि दूसरी ओर खाली कमरों को गेस्ट चार्ज के आधार पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
विद्यार्थियों ने मांग की कि जिन नए छात्रों से छात्रावास में रहने के लिए गेस्ट चार्ज लिया गया है, यदि उन्हें नियमों के तहत आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए था, तो उनसे वसूली गई राशि वापस की जाए। छात्रों का कहना है कि आर्थिक रूप से अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय प्रशासन को पहले पात्र विद्यार्थियों को नियमानुसार छात्रावास उपलब्ध कराना चाहिए।
डीएसडब्ल्यू कार्यालय में भी रखी गई थी शिकायत
छात्रों के मुताबिक, इस मामले को लेकर छात्र अधिष्ठाता (डीएसडब्ल्यू) के समक्ष भी शिकायत रखी जा चुकी है। विद्यार्थियों का कहना है कि वहां समस्या से अवगत कराने के बावजूद अभी तक ऐसा समाधान नहीं मिला है जिससे सभी प्रभावित छात्रों को राहत मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई स्तरों पर अपनी बात रखी है। इसके बाद भी यदि समस्या बनी रहती है तो उन्हें दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
8 सितंबर को सौंपा था आवेदन
दिव्यांग विद्यार्थियों ने बताया कि उन्होंने 8 सितंबर को संयुक्त कुलसचिव और दिव्यांगता प्रकोष्ठ के प्रमुख को लिखित आवेदन दिया था। आवेदन के माध्यम से विश्वविद्यालय से मांग की गई थी कि नियमावली के प्रावधान लागू करने के लिए लिखित रूप से समय-सीमा तय की जाए।
छात्रों ने यह भी मांग रखी थी कि जिन दिव्यांग विद्यार्थियों को अब तक छात्रावास आवंटित नहीं हुआ है, उन्हें उपलब्ध खाली कमरों में अस्थायी रूप से रहने की अनुमति दी जाए। साथ ही नए विद्यार्थियों से लिए जा रहे गेस्ट चार्ज को वापस करने की मांग भी आवेदन में शामिल थी। विद्यार्थियों का आरोप है कि आवेदन दिए जाने के बाद भी उन्हें अब तक स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला। इसी वजह से गुरुवार को छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने संभाला मोर्चा
प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाकर प्रदर्शन समाप्त कराने का प्रयास किया।
छात्रों ने फिलहाल प्रशासन को समस्या दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। विद्यार्थियों का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में छात्रावास आवंटन और नियमावली के अनुपालन से जुड़ी विसंगतियों को दूर नहीं किया गया तो वे आगे की रणनीति तय करेंगे।
दिव्यांग छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग विश्वविद्यालय की मौजूदा नियमावली के अनुसार पात्र विद्यार्थियों को छात्रावास उपलब्ध कराने और तब तक खाली कमरों में रहने की व्यवस्था करने की है। छात्रों का कहना है कि उन्हें आश्वासन के बजाय अब ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।
