- बुनियादी सुविधाओं पर भड़का जनाक्रोश, तीन माह से दूषित पेयजल की शिकायत, नतीजा फिसड्डी
- अधूरे निर्माण कार्यों से टूटी सड़कें, धूल-गड्ढों ने बढ़ाई आमजन की परेशानी
- बरसात से पहले नाला-सफाई और सीवर व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग तेज
वाराणसी (रणभेरी) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान वाले रामनगर में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। काशी नरेश की परंपराओं और रामनगर किले के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में पेयजल, सड़क, सीवर और सफाई जैसी मूलभूत समस्याओं ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
क्षेत्र के कई मोहल्लों में पिछले करीब तीन महीनों से दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि नलों से बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी रविंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि सरकारी जलापूर्ति व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम होता जा रहा है और कई परिवार पीने के पानी के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने को मजबूर हैं। वहीं मीरा देवी ने बताया कि जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।
रामनगर के मुख्य बाजार और आसपास के इलाकों में अधूरे विकास कार्य भी लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बने हुए हैं। नागरिकों के अनुसार गैस पाइपलाइन, केबल और अन्य भूमिगत परियोजनाओं के लिए कई स्थानों पर सड़कें खोदी गईं, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद उन्हें पूर्व स्थिति में नहीं लाया गया। परिणामस्वरूप जगह-जगह गड्ढे, धूल और निर्माण सामग्री लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। बरसात के मौसम को देखते हुए लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
व्यापारियों का कहना है कि अव्यवस्थित निर्माण कार्यों का सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ रहा है। चाय विक्रेता बनारसी यादव के अनुसार धूल और अव्यवस्था के कारण ग्राहकों की संख्या प्रभावित हुई है। वहीं फूल व्यवसायी पप्पू माली का आरोप है कि विकास कार्य शुरू तो किए गए, लेकिन उन्हें समय पर पूरा नहीं किया गया, जिससे आम जनता और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

युवाओं और समाजसेवियों ने भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता आनंद चौहान का कहना है कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई देती है। लोगों को यह तक नहीं पता चल पाता कि किसी समस्या के समाधान के लिए कौन विभाग जिम्मेदार है। युवा व्यापारी आफताब उर्फ शेरू ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर खुदाई के दौरान पेयजल पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त हुईं, लेकिन उनकी मरम्मत प्रभावी ढंग से नहीं की गई।
समाजसेवी डीके ओझा ने सड़क, सीवर, सफाई और पेयजल जैसी समस्याओं के लंबे समय तक बने रहने पर चिंता जताई है। वहीं समाजसेवी डंडा गुरु ने बरसात और मुहर्रम को देखते हुए विशेष अभियान चलाकर नालों एवं सीवर लाइनों की सफाई कराने की मांग की है। वार्ड 65 के पार्षद रामकुमार यादव ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को कई बार संबंधित विभागों के संज्ञान में लाया गया है और समाधान के प्रयास जारी हैं।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए। नागरिकों ने दूषित पेयजल की समस्या के स्थायी समाधान, खुदी सड़कों के पुनर्निर्माण और नालों-सीवरों की व्यापक सफाई की मांग की है। रामनगर की वर्तमान स्थिति ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
