वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के शास्त्री घाट स्थित जिला मुख्यालय परिसर में गुरुवार को बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी की महानगर और जिला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल एवं धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आवाज बुलंद की गई। साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व महानगर अध्यक्ष अमन यादव और जिला अध्यक्ष जितेंद्र यादव (मलिक) ने किया। इस दौरान समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष सुजीत यादव ‘लक्कड़ पहलवान’ सहित कई राजनीतिक कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि, छात्र और बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखते हुए युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाएं प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही हैं। उनका कहना था कि वर्षों की मेहनत करने वाले लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य ऐसे मामलों से प्रभावित होता है, इसलिए सरकार को परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। साथ ही पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि परीक्षा व्यवस्था में लगातार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक लोकतांत्रिक तरीके से छात्रों, युवाओं और जनहित से जुड़े विषयों को उठाते रहे हैं। उनका कहना था कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, इसलिए उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और उचित संवाद स्थापित करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में प्रदर्शनकारियों ने सरकार से युवाओं के भविष्य की सुरक्षा, परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू करने तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि इन मुद्दों पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
