वाराणसी (रणभेरी): मानसून के आगमन से पहले शहर को जलभराव की समस्या से बचाने के लिए नगर निगम द्वारा नालों की सफाई का अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, कई इलाकों से लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि नालों की सफाई केवल कागजों तक सीमित है और जमीनी स्तर पर कार्य अपेक्षित गुणवत्ता के साथ नहीं हो रहा है। इन शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए नगर आयुक्त ने विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आईं।
निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने पाया कि कई स्थानों पर नाला सफाई का कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा था। इसके बाद उन्होंने संबंधित ठेकेदार फर्म अध्या ट्रेडर्स पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाने के निर्देश दिए। साथ ही कार्य की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अवर अभियंता के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई।
औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल
नगर निगम प्रशासन द्वारा शहर के प्रमुख और छोटे-बड़े नालों की सफाई का कार्य मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में नगर आयुक्त ने सुंदरपुर, साकेत नगर, संकट मोचन और नरिया क्षेत्र के नालों का निरीक्षण किया।
सुंदरपुर सब्जी मंडी के पास निरीक्षण के दौरान मशीनों से नाला सफाई का कार्य चलता हुआ दिखाई दिया, लेकिन मौके पर स्थिति कुछ और ही थी। नाले में बड़ी मात्रा में गाद जमी हुई थी और कई हिस्सों में झाड़ियां तथा छोटे पौधे उगे हुए मिले। इससे स्पष्ट हुआ कि सफाई का कार्य पूरी गहराई तक नहीं किया गया था।
नगर आयुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से इस संबंध में जानकारी ली और कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि नालों की केवल ऊपरी सतह की सफाई कर औपचारिकता पूरी करना स्वीकार्य नहीं है।
कई स्थानों पर मिली खामियां
निरीक्षण के दौरान साकेत नगर पुलिया, संकट मोचन क्षेत्र तथा गांधीनगर कॉलोनी के समीप स्थित नरिया नाले की भी जांच की गई। इन स्थानों पर भी सफाई कार्य संतोषजनक नहीं पाया गया। कई जगह नालों में गाद जमा थी और तली तक सफाई नहीं कराई गई थी। नगर आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि नालों की सफाई केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से की जा रही है। यदि गुणवत्ता से समझौता किया गया तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
ठेकेदार फर्म पर आर्थिक दंड
निरीक्षण में लगातार खामियां मिलने के बाद नगर आयुक्त ने नाला सफाई का कार्य कर रही फर्म अध्या ट्रेडर्स पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। उनका कहना था कि कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्य में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दिया।
नगर निगम प्रशासन का मानना है कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या का बड़ा कारण नालों में जमा गाद और कचरा होता है। ऐसे में सफाई कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अवर अभियंता के खिलाफ भी कार्रवाई
केवल ठेकेदार फर्म ही नहीं, बल्कि कार्य की निगरानी कर रहे अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। नगर आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान संबंधित अवर अभियंता पंकज पटेल की भूमिका पर असंतोष जताते हुए उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने के निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि नाला सफाई कार्य की नियमित निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य
नगर निगम ने शहर के सभी प्रमुख नालों, गलियों के पिट और सीवर लाइनों की सफाई का कार्य 15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। नगर आयुक्त ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि सफाई कार्य पूरी गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप कराया जाए। आगे भी लगातार निरीक्षण किए जाएंगे और जहां कहीं भी लापरवाही मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
जलभराव रोकने पर नगर निगम का फोकस
नगर निगम प्रशासन का दावा है कि इस वर्ष मानसून के दौरान शहर में जलभराव की समस्या को कम करने के लिए विशेष तैयारी की जा रही है। नालों की तली तक सफाई, सीवर लाइनों की जांच और जल निकासी तंत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ पूरे हो जाते हैं, तो बारिश के मौसम में शहरवासियों को काफी राहत मिल सकती है। वहीं, लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला भी जारी रहेगा।
