वाराणसी (रणभेरी): धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में गंगा के घाटों पर संगीत का अनूठा रंग देखने को मिलता है। इसी परंपरा के बीच गुरुवार की शाम तुलसी घाट पर भजन गायिका और अलीनगर की विधायक मैथिली ठाकुर पहुंचीं। अपने दोनों भाइयों के साथ घाट पर आईं मैथिली ने वहां मौजूद युवाओं के साथ भजन और गीत गाकर शाम को यादगार बना दिया।
तुलसी घाट की सीढ़ियों पर युवाओं ने हारमोनियम, ढोलक और गिटार के साथ संगीत की महफिल सजाई थी। इसी दौरान मैथिली ठाकुर भी उनके बीच शामिल हो गईं। उनके पहुंचने के बाद संगीत का माहौल और भी खास हो गया। करीब एक घंटे तक चले इस कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं के साथ अलग-अलग गीतों और भजनों की प्रस्तुति दी।
तुलसी घाट आकर मन को मिली शांति
मैथिली ठाकुर ने तुलसी घाट को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान बताया। उन्होंने कहा कि काशी के इस पवित्र घाट पर आकर उन्हें सुकून का अनुभव हुआ। यहां के युवाओं के साथ बैठकर गीत गाना उनके लिए एक अलग और यादगार अनुभव रहा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी घाट का संबंध गोस्वामी तुलसीदास से है। मान्यता है कि उन्होंने इसी स्थान पर रामचरितमानस की रचना की थी। ऐसे आध्यात्मिक परिवेश में संगीत और भक्ति का संगम कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा।
संगीत के जरिए जुड़ीं युवाओं के साथ
काशी के घाटों पर युवाओं का समूह बनाकर भजन और गीत गाना शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। तुलसी घाट पर भी वाद्ययंत्रों के साथ जुटे युवाओं के बीच मैथिली ठाकुर की मौजूदगी ने इस परंपरा को एक खास रंग दिया। करीब एक घंटे तक चली इस संगीतमय बैठक में भक्ति और लोकसंगीत का माहौल बना रहा।
