तीन जेसीबी, 100 से ज्यादा मजदूर और ड्रोन निगरानी के बीच चला ध्वस्तीकरण अभियान; मलबे और धूल से पैदल चलना भी मुश्किल
वाराणसी (रणभेरी): दालमंडी की पहचान रही चहल-पहल और व्यापारिक रौनक इन दिनों मलबे और मशीनों की आवाजों में कहीं खोती नजर आ रही है। तंग गलियों के चौड़ीकरण अभियान के तहत प्रशासन द्वारा लगातार चलाए जा रहे ध्वस्तीकरण अभियान ने इलाके का स्वरूप तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। गुरुवार को भी दालमंडी में बुलडोजर गरजते रहे और हथौड़ों की चोट के बीच कई भवनों और दुकानों को जमींदोज करने की कार्रवाई जारी रही। लगातार छह दिनों से चल रही इस मुहिम ने इलाके की रफ्तार और रौनक दोनों को प्रभावित कर दिया है।

मुसाफिरखाना के आसपास चिह्नित 17 भवनों और दुकानों पर प्रशासन की कार्रवाई दूसरे चरण में और तेज हो गई है। भवनों को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए तीन जेसीबी मशीनों के साथ सौ से अधिक श्रमिकों को लगाया गया है। श्रमिकों के हथौड़ों की आवाज और मशीनों की गूंज के बीच पूरी गली मलबे के ढेर में तब्दील होती दिख रही है। कई पुराने ढांचे अब इतिहास बनने की कगार पर हैं।
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए 3इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पैरा मिलिट्री फोर्स के साथ भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। दालमंडी की गलियों में दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। आसपास की दुकानों को भी एहतियातन बंद कराया गया। वहीं पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों के जरिए पल-पल की जा रही है।पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के अधिकारी लाउडहेलर के जरिए लगातार लोगों को चौड़ीकरण की जद में आए भवनों को जल्द खाली करने की चेतावनी देते रहे।
सुबह से ही अधिकारियों ने चिह्नित भवनों को तत्काल खाली कराने के लिए अल्टीमेटम जारी किया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण अभियान और तेज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे रहे। एडीएम सिटी आलोक कुमार वर्मा, एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी तथा पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह लगातार हालात की निगरानी करते रहे।

भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी के कारण विरोध की कोई बड़ी स्थिति सामने नहीं आई। हालांकि इलाके में पूरे दिन गहमागहमी और बेचैनी का माहौल बना रहा। कभी व्यापार और भीड़भाड़ से गुलजार रहने वाली दालमंडी अब टूटती दीवारों, उड़ती धूल और मलबे के बीच धीरे-धीरे वीरानी की तस्वीर पेश करती दिखाई दे रही है।
मुआवजा और रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी जारीचौड़ीकरण के दायरे में आने वाले कुल 181 मकानों में से लगभग 60 प्रतिशत पर प्रशासन अब तक कार्रवाई शुरू कर चुका है। के.के. सिंह ने बताया कि स्थानीय निवासियों का सहयोग भी मिल रहा है और लोग स्वेच्छा से रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करवा रहे हैं। प्रशासन का प्रयास है कि विस्थापन और निर्माण के बीच एक समन्वय बना रहे ताकि विकास का लाभ जल्द से जल्द काशीवासियों को मिल सके।मलबा से पटी गली, आवाजाही मुश्किलदालमंडी में मकानों के ध्वस्तीकरण से मलबा का अंबार लग गया है।
सकरी गली में चारों तरफ धूल और मिट्टी का गुब्बार उड़ रहा है। सकरी गली में पैदल आना- जाना भी मुश्किल हो गया है। ध्वस्तीकरण से गली में टूटे-फूटे ईंट, गिट्टी बिखरी पड़ी है। बुलडोजर की तेज आवाज भी गूंज रही है। क्षेत्र के दुकानदारों का कहना है कि दालमंडी उजड़ गयी है। अब न ग्राहक आ रहे हैं और न ही बिक्री हो रही है।
