उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पैतृक मकान पर फिर बवाल, तोड़फोड़ करने पहुंचे बिल्डर; पुलिस ने संभाला मोर्चा

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पैतृक मकान पर फिर बवाल, तोड़फोड़ करने पहुंचे बिल्डर; पुलिस ने संभाला मोर्चा

वाराणसी (रणभेरी): भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के सराय हड़हा स्थित पैतृक मकान को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। रविवार सुबह मकान के सामने वाले हिस्से को तोड़ने के लिए बिल्डर के लोग पहुंचे तो परिजनों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने तोड़फोड़ से संबंधित वैध दस्तावेज और प्रशासनिक अनुमति दिखाने की मांग की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी होने लगी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को पियरी चौकी ले गई। वहां समझा-बुझाकर मामला शांत कराया गया।

परिजनों का आरोप है कि बिल्डर के पास मकान तोड़ने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या प्रशासनिक अनुमति नहीं है। इस संबंध में किसी न्यायालय का आदेश भी सामने नहीं आया है। ऐसे में बिना कानूनी आधार के मकान तोड़ने की कोशिश की जा रही है। परिजनों ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की इस धरोहर को सुरक्षित रखने की मांग की है।

दस साल से चल रहा विवाद

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पैतृक मकान को लेकर पिछले करीब दस वर्षों से विवाद चल रहा है। रविवार को दोबारा तोड़फोड़ की कोशिश के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने मौके पर बल तैनात किया। चौक इंस्पेक्टर विजय कुमार शुक्ला के मुताबिक, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल पुलिस टीम भेजी गई थी। दोनों पक्षों को समझाकर फिलहाल शांत करा दिया गया है। पुलिस मकान से जुड़े कानूनी और मालिकाना हक के दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जिस कमरे में रहते थे उस्ताद, बनेगा संग्रहालय

एक ओर पैतृक मकान को लेकर विवाद जारी है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम ने इस ऐतिहासिक धरोहर को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, मकान के जिस हिस्से में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां रहते थे, उसे संग्रहालय बनाया जाएगा। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है। टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी होने की जानकारी दी गई है।

योजना के तहत मकान के मुख्य भवन का सुंदरीकरण किया जाएगा। साथ ही आसपास की गलियों का नवीनीकरण और चौड़ीकरण होगा। सड़क, फुटपाथ, लाइटिंग और भवन के मुख्य हिस्से (फसाड) को भी बेहतर बनाया जाएगा। नगर निगम ने इस पूरी योजना के लिए करीब 30 करोड़ रुपये के फंड की व्यवस्था की है।

टोपी से लेकर शहनाई तक सहेजी जाएंगी यादें

नगर आयुक्त के मुताबिक, मकान के सबसे ऊपरी तल पर स्थित उस कमरे को म्यूजियम का रूप दिया जाएगा, जहां उस्ताद का जीवन बीता था। यहां उनसे जुड़ी वस्तुओं को संरक्षित किया जाएगा। इनमें उनकी टोपी, छाता, लालटेन, शहनाई, हाथ का पंखा, बक्सा, चप्पल और कलम सहित अन्य निजी सामान शामिल हैं। उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ियां इस महान शहनाई वादक के जीवन और विरासत से रूबरू हो सकें।

आजादी की पहली सुबह लालकिले से गूंजी थी शहनाई

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां भारतीय शास्त्रीय संगीत के उन महान कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने शहनाई को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के अवसर पर लालकिले से उनकी शहनाई की धुन गूंजी थी। उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के अलावा पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।

दुनिया भर में ख्याति हासिल करने के बावजूद उस्ताद का काशी से गहरा लगाव रहा। उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इसी शहर में बिताया। ऐसे में उनके पैतृक मकान को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि शहर की इस अनमोल सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

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