वाराणसी (रणभेरी) : अक्षय तृतीया के अवसर पर इस वर्ष विशेष शुभ संयोग बनने से श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। तिथि की शुरुआत रविवार दोपहर से होने के बावजूद उदया तिथि के आधार पर पर्व सोमवार को मनाया गया। सुबह होते ही काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोगों ने पवित्र स्नान कर दान-पुण्य के साथ अक्षय फल की कामना की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन इस बार बने नौ विशेष योग और कई शुभ मुहूर्तों ने इसे और भी खास बना दिया। इसी कारण कई लोगों ने रविवार से ही उपनयन संस्कार, पूजा-पाठ और खरीदारी जैसे कार्य शुरू कर दिए थे।
घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालु गंगा स्नान कर पुरोहितों को दक्षिणा अर्पित करते नजर आए। दान में चांदी, चावल, दूध, गेहूं, हल्दी, दाल, इत्र और वस्त्र जैसी वस्तुएं दी गईं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और पूजन अक्षय फल प्रदान करता है।
वहीं बाजारों में भी जबरदस्त रौनक देखने को मिली। लोग सोना-चांदी के आभूषण, बर्तन, धार्मिक प्रतिमाएं और नए वाहन तक खरीदते नजर आए। कई लोगों ने इस शुभ दिन पर नया व्यापार या निवेश भी शुरू किया।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार सौभाग्य, आयुष्मान, राजयोग और त्रिपुष्कर सहित कई शुभ योग बने। रोहिणी नक्षत्र और सूर्य-चंद्रमा की अनुकूल स्थिति ने इस दिन को और प्रभावशाली बना दिया।
इसी क्रम में धर्मसंघ शिक्षा मंडल, दुर्गाकुंड में बड़े स्तर पर यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए करीब 1100 बटुकों ने भाग लिया। विधि-विधान से संपन्न इस अनुष्ठान में वैदिक परंपराओं के साथ शिक्षा की भी शुरुआत कराई गई। अक्षय तृतीया के इस पावन अवसर पर पूरे शहर में आस्था, परंपरा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।
