वाराणसी (रणभेरी): रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े भवनों पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में शनिवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। निर्धारित कार्यक्रम के तहत दोपहर करीब एक बजे बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के कई भवनों को लेकर जारी नोटिस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के रोजगार पर भी संकट खड़ा होने की आशंका है।
नोटिस वापस लेने की मांग
एआईएमआईएम के महानगर अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय प्रदेश का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है, जिसकी स्थापना समाज के सहयोग और विभिन्न संसाधनों के माध्यम से की गई। उनके अनुसार यदि विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त किया जाता है तो इसका सीधा प्रभाव वहां अध्ययनरत हजारों छात्रों और कर्मचारियों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा विश्वविद्यालय को संरक्षण प्रदान किया जाए।
कार्रवाई को बताया अनुचित
मुख्तार अहमद अंसारी ने आरोप लगाया कि विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय के कई भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी किया है, जबकि जिस समय इन भवनों का निर्माण हुआ था, उस दौरान संबंधित क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल नहीं था। उनका कहना था कि वर्षों बाद पुराने निर्माणों को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक कमी पाई गई है तो उसका समाधान नियमानुसार निकाला जाना चाहिए। भवनों को गिराना अंतिम विकल्प नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा।
सभी शिक्षण संस्थानों पर समान नीति लागू करने की मांग
महानगर अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास प्राधिकरणों की स्थापना के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अनेक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और अन्य शिक्षण संस्थानों का निर्माण हुआ। यदि भवन निर्माण के लिए मानचित्र अथवा अन्य स्वीकृतियां अनिवार्य थीं, तो सरकार को सभी संस्थानों के लिए समान नियम लागू करने चाहिए।
उन्होंने मांग की कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के निर्माण की भी निष्पक्ष एवं समान मानकों के आधार पर समीक्षा की जाए, ताकि किसी एक संस्थान के साथ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
सरकार से संरक्षण और सहयोग की अपील
पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के किसी भवन के निर्माण में नियमों से संबंधित कोई कमी है तो सरकार को कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना था कि जौहर विश्वविद्यालय हजारों विद्यार्थियों की शिक्षा का केंद्र है, इसलिए राज्य सरकार को संस्थान के संरक्षण के साथ-साथ बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था के लिए आवश्यक सहयोग और अनुदान उपलब्ध कराना चाहिए।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
आगे की रणनीति पर बोलते हुए मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो एआईएमआईएम पूरे उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से जनजागरण अभियान चलाएगी। पार्टी के निर्देशानुसार विभिन्न जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और अन्य संवैधानिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पार्टी संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद करेगी और इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर प्रमुखता से उठाएगी।
ज्ञापन के प्रमुख बिंदु
ज्ञापन में रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस वापस लेने, जौहर विश्वविद्यालय को संरक्षण देने, छात्रों की पढ़ाई और कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने तथा यदि किसी प्रकार की तकनीकी या कानूनी कमी हो तो उसका समाधान नियमों के अनुसार किए जाने की मांग की गई। पार्टी का कहना है कि शिक्षा संस्थानों से जुड़े मामलों में सरकार को संतुलित और समान नीति अपनानी चाहिए ताकि विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।
