अवैध हथियार तस्करी मामले में गिरफ्तार आरोपी को 48 घंटे मिली जमानत

अवैध हथियार तस्करी मामले में गिरफ्तार आरोपी को 48 घंटे मिली जमानत

वाराणसी (रणभेरी): पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में सक्रिय अपराधियों तक अवैध हथियार पहुंचाने वाले कथित गिरोह के खिलाफ हाल ही में हुई पुलिस कार्रवाई के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक को गिरफ्तारी के मात्र दो दिन बाद अदालत से जमानत मिल गई। इस फैसले के बाद पुलिस की विवेचना और अभियोजन पक्ष की तैयारियों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, चोलापुर थाना पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने बीते दिनों अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री करने वाले एक नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया था। कार्रवाई के दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना था कि यह गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क स्थापित कर विभिन्न आपराधिक तत्वों तक हथियार पहुंचाने का काम करता था।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने अलग-अलग बोर की कई पिस्टलें, कारतूस, मोबाइल फोन और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद करने का दावा किया था। इसके अलावा एक संदिग्ध मोटरसाइकिल भी बरामद की गई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद सामग्री के आधार पर गिरोह के व्यापक नेटवर्क की जांच की जा रही है।

अदालत से मिली राहत

गुरुवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) की अदालत ने मामले में गिरफ्तार आरोपी आभाष सिंह को जमानत प्रदान कर दी। न्यायालय ने आरोपी को 30 हजार रुपये के निजी मुचलके और आवश्यक शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को व्यक्तिगत रंजिश और दुर्भावना के कारण मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी का किसी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है तथा उसके विरुद्ध लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से कमजोर हैं।

अभियोजन पक्ष नहीं दे सका ठोस आधार

अदालती कार्यवाही के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पूर्व में किसी प्रकार का आपराधिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष से जमानत का विरोध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर अदालत ने आरोपी को राहत प्रदान कर दी।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि पुलिस और अभियोजन पक्ष प्रारंभिक चरण में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं तो गंभीर मामलों में भी आरोपियों को जमानत मिलना आसान हो जाता है।

48 घंटे में जमानत से बढ़ी चर्चा

गौरतलब है कि पुलिस ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताते हुए अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क के भंडाफोड़ का दावा किया था। ऐसे में गिरफ्तार आरोपियों में से एक को मात्र 48 घंटे के भीतर जमानत मिलना पुलिस कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद अन्य छह आरोपियों की ओर से भी जमानत याचिकाएं दाखिल की जा सकती हैं।

सात लोगों की हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस द्वारा दर्ज मामले में कुल सात युवकों को आरोपी बनाया गया है। इनकी आयु लगभग 19 से 28 वर्ष के बीच बताई गई है। सभी के विरुद्ध आर्म्स एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके संपर्कों तथा संभावित नेटवर्क की जांच की जा रही है। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों के पास गिरोह की पूर्व गतिविधियों अथवा किसी बड़े आपराधिक रिकॉर्ड के संबंध में सीमित जानकारी ही सामने आई है।

आगे की जांच पर टिकी निगाहें

मामले में एक आरोपी को जमानत मिलने के बाद अब पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जांच एजेंसियां गिरोह के नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने में सफल होती हैं, तो मामले में नए खुलासे सामने आ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष लगातार आरोपियों की बेगुनाही का दावा कर रहा है।

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