68500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन, हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजे गए

68500 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन, हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेजे गए

(रणभेरी): 68500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में आरक्षण से जुड़ी कथित विसंगतियों के समाधान और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उत्तर प्रदेश की संस्तुति लागू किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों ने सरकार से आयोग की संस्तुति पर तत्काल निर्णय लेने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया और बाद में उन्हें ईको गार्डन भेज दिया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि 68500 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से संबंधित कई सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। इन कथित विसंगतियों के समाधान के लिए अभ्यर्थी लगातार शासन और संबंधित विभाग के समक्ष अपनी मांग रखते आ रहे हैं। उनका दावा है कि मामले में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अभ्यर्थियों के पक्ष में संस्तुति जारी की है, लेकिन काफी समय गुजरने के बाद भी उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के मुताबिक, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति में उन अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को राहत दिए जाने की बात कही गई है, जिन्होंने 150 अंकों की परीक्षा में 60 या उससे अधिक अंक हासिल किए हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि ऐसे उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों के तहत उत्तीर्ण मानते हुए नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि इस मामले का प्रभाव केवल ओबीसी श्रेणी तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार आरक्षण व्यवस्था से जुड़े लाभों के अंतर्गत आने वाले दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को भी इससे राहत मिल सकती है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आयोग की ओर से संस्तुति किए जाने के बावजूद शासन और संबंधित विभाग की ओर से अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

बोले अभ्यर्थी- अधिकार के लिए कर रहे संघर्ष

अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष वर्ग को अतिरिक्त लाभ देने की नहीं है, बल्कि आरक्षण संबंधी नियमों और आयोग की संस्तुति के अनुसार पात्र उम्मीदवारों को उनका अधिकार दिलाने की है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले में बिना किसी और देरी के स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, वर्षों से लंबित इस मामले के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित विवाद का शीघ्र निस्तारण होने से उन अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारियों ने केवल नियुक्ति की मांग ही नहीं उठाई, बल्कि आरक्षण से जुड़ी कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग भी की। उनका कहना है कि यदि आयोग की संस्तुति में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है तो शासन को इस पहलू पर भी गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।

अभ्यर्थियों ने कहा कि मामले में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आरक्षण से संबंधित विसंगतियां किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में सामने आईं। इसके साथ ही जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

तूफान सिंह बोले- किसी से अहसान नहीं मांग रहे

धरने का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह ने कहा कि अभ्यर्थी सरकार से किसी तरह की विशेष कृपा या अहसान नहीं मांग रहे हैं। उनकी मांग केवल यह है कि नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप उन्हें न्याय मिले।

उन्होंने कहा कि 68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से सामने आई संस्तुति के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि अब शासन स्तर पर जल्द निर्णय होगा, लेकिन कार्रवाई में देरी होने से उनकी चिंता और नाराजगी बढ़ी है।

तूफान सिंह ने कहा कि सरकार को मामले को और लंबा खींचने के बजाय आयोग की संस्तुति पर तत्काल विचार कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पात्र अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता खत्म हो सके।

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से जारी आदेश/संस्तुति पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए।
  • 150 अंकों में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले संबंधित पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार उत्तीर्ण घोषित कर नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
  • ओबीसी के साथ-साथ संबंधित आरक्षित श्रेणियों में आने वाले पात्र दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित अभ्यर्थियों के मामले में भी नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
  • आरक्षण संबंधी कथित विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय की जाए।
  • आयोग की संस्तुति पर शासन और विभाग की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
  • पूरे प्रकरण का जल्द और निष्पक्ष तरीके से निस्तारण किया जाए।

हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी

मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को प्रशासन ने हिरासत में लिया। बाद में उन्हें ईको गार्डन भेज दिया गया।

अभ्यर्थियों ने कहा कि हिरासत में लिए जाने के बावजूद उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक आयोग की संस्तुति पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती और पात्र अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिलता, तब तक वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

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