(रणभेरी): संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा और बेलवन स्थित आश्रम की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने सोमवार को संत प्रेमानंद महाराज को पत्र भेजकर बेलवन आश्रम छोड़कर गोवर्धन में निवास करने और साधना करने का आग्रह किया है। उन्होंने सरकार से संत को जेड प्लस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
पत्र में दिनेश फलाहारी ने आश्रम से जुड़े कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आश्रम के आसपास कथित रूप से ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो साधु का वेश धारण किए हुए हैं और जमीनों की खरीद-फरोख्त समेत अन्य गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने यमुना के डूब क्षेत्र और खादर की जमीनों को लेकर भी जांच की आवश्यकता जताई है।
आश्रम में गुटबाजी का लगाया आरोप
दिनेश फलाहारी के अनुसार, श्रीहित राधा केलिकुंज आश्रम से जुड़े लोगों के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। पत्र में दावा किया गया है कि आश्रम से जुड़े दो पक्षों के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद है। एक पक्ष कथित तौर पर यह दावा करता है कि उसने संत प्रेमानंद महाराज को व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने संत की बढ़ती लोकप्रियता का कथित लाभ उठाने का प्रयास किया। इसमें भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये दिए जाने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जमीनों की खरीद-फरोख्त की जांच की मांग
फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि बेलवन आश्रम और उसके आसपास यमुना के डूब क्षेत्र की जमीनों को लेकर कथित तौर पर खरीद-बिक्री का कारोबार चल रहा है। उन्होंने कुछ भूमाफिया और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पत्र में बच्चों के लापता होने और उनके साथ कथित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े बेहद गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इन दावों की जांच के लिए उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग रखी है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
सीएम योगी को पहले भी भेज चुके हैं पत्र
दिनेश फलाहारी इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा और केलिकुंज आश्रम के आसपास की गतिविधियों की जांच की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि आश्रम से जुड़े विवादों और संपत्ति संबंधी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उनके अनुसार, आश्रम से जुड़ी कथित व्यावसायिक और संपत्ति गतिविधियों से असहमति के चलते प्रेमानंद महाराज बेलवन चले गए थे। बाद में आश्रम के आसपास संदिग्ध लोगों की मौजूदगी और बच्चों के लापता होने जैसी आशंकाओं का उल्लेख भी किया गया।
संतों ने प्रेमानंद महाराज के समर्थन में दी प्रतिक्रिया
वहीं, संत प्रेमानंद महाराज को लेकर सामने आ रहे आरोपों के बीच ब्रज के कई संतों और भागवताचार्यों ने उनका समर्थन किया है। उनका कहना है कि किसी भी संत पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है।
भागवताचार्य चित्रलेखा ने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज के बारे में बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने अधूरी जानकारी को नुकसानदेह बताते हुए लोगों से संयम बरतने की अपील की।
मलूक पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास महाराज ने भी संतों और महापुरुषों की आलोचना को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि समाज में कई बार महापुरुषों के योगदान को नजरअंदाज कर केवल विवादों को चर्चा का विषय बना दिया जाता है।
भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य ने भी प्रेमानंद महाराज के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या संत के खिलाफ निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों को सामने रखना चाहिए। उनके मुताबिक, प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रभावित हुए हैं और लोगों को सनातन परंपरा से जोड़ने में उनकी भूमिका रही है।
गोवर्धन में रहने की अपील
दिनेश फलाहारी ने अपने पत्र के अंत में प्रेमानंद महाराज से विवादों से अलग रहने और गोवर्धन की पवित्र भूमि में रहकर साधना करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन में संत का निवास उनके लिए अधिक सुरक्षित हो सकता है। फिलहाल, पत्र में लगाए गए गंभीर आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया और किसी जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।
